विजयदशमी की शुभकामनाएँ

 

 

छाया था आतंक हर तरफ़ रावण का साया था
जिसकी काली करतूतों ने सबको भरमाया था

अपने मद में चूर भंग अनुशासन करता था
उड़ता था आकाश दूसरों पर शासन करता था

मनमानी में भूल गया अन्याय न्याय की रेखा
सीता को हर ले जाने का परिणाम ना देखा

सोचा नहीं राम से भिड़ना जीवन घातक होगा
अहंकार जिस बल पर उसका खुद ही नाशक होगा

घटा महासंग्राम युद्ध में रावण का संहार हुआ
हुई अधर्म की हार धर्म का स्थापित संसार हुआ

सच है जग में अंत बुराई का एक दिन होना है
सच्चाई पर चलने वाला राम विजित होना है

हर विजयादशमी के दिन एक रावण जल जाता है
हर दशहरे पर राम विजय का हर्ष उभर आता है

यही कामना रावण का हो अंत राम की विजय
करें सभी जयघोष - सियावर रामचंद्र की जय!


पूर्णिमा वर्मन



(आप भी इस पृष्ठ पर ऊपर बने रावण को अपने माउस से धराशायी कर सकते हैं। याद रखें रावण एक बार में नहीं मरता उसे बार-बार ज़ोर से मारना पड़ता है तो फिर शुरू हो जाएँ क्लिक-क्लिक-क्लिक देखें कितनी बार में गिरता हे यह रावण)

Click here to send this site to a friend!