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जॉर्ज
और आलबर्ट, जंग फ्लोरिडा की
अमेरिका... लोकतन्त्र का प्रतीक... कोने कोने से
आकर बसे हुए लोग अमेरिका में... ये दो हजार साल की
नवम्बर की सात तारीख... जॉर्ज और आलबर्ट की
जंग... कौन होगा अमेरिका का नया प्रमुख? सबकी नज़र
फ्लोरिडा पर... किसने किसको अपना मत दिया? गिनो,
फिर से गिनो, बार बार गिनो, मगर देखो... कहीं गलती
ना हो जाय... क्या गुज़र रही होगी जॉर्ज और आलबर्ट
के दिमाग में?
ना तो मेरी जॉर्ज और आलबर्ट से पहचान है, ना मैंने
ज्यादा कुछ इन दो लोगों के बारे में पढा. हैं...
फिर भी सोचा कि दो इन्सान के मनमंथन को वाणी दे दी
जाय... शायद कुछ अनोखा अजीब सा प्रयत्न रहेगा...
ये रहा संवाद जॉर्ज और आलबर्ट का... आप पढ़े तो ये
सोच कर पढ़ें कि ये कोई सच वृत्तांत नहीं...
"हैलो जॉर्ज, मैं आलबर्ट, पहचाना मुझे? देखो, एक
तरकीब है... क्यों न हम एक दूसरे को जाहिर में
मिले? मतलब ये कि ये फ्लोरिडा के मत की गिनती पूरी
हो उससे पहले...देश के लिए अच्छा रहेगा...जीत या
हार, वैसे हमें एक दूसरे को बाद में मदद तो करनी
ही होगी... "
जॉर्ज सुन कर चकित रह गया... गुस्सा कम होने के
बजाय बढ़ गया।
"क्या हिम्मत है तुम्हारी आलबर्ट... ये कौन सा नया
खेल है? तीन बार डिबेट कीं, तीन बार अलग अलग नज़र
आयें , ये क्या आलबर्ट का चौथा स्वरूप हैं? एक दफे
हार मान ली, फिर बदल गये... देखते नहीं, देश और
दुनिया को कितनी द्विविधा में गिरा दिया तुमने?
कैसे आदमी हो, किसी भी कीमत पर जीत ही चाहते हो?
मैं कोई तुमसे मिलना–विलना नहीं चाहता..."
जॉर्ज के पिताजी नज़दीक में खड़े थे, आँखों के इशारे
से बता दिया, "वाह, जॉर्ज बेटे, जबान तोड़ के जवाब
दिया!"
जॉर्ज की पत्नी लौरा भी बाजू में थी, जल्दी से
जॉर्ज के लिए पानी का गिलास हाजिर कर दिया, शायद
जॉर्ज को जरूरत पड़े...
आलबर्ट को अग्नि की ज्वाला महसूस होने लगी...
"जॉर्ज, इतना गरम होने की जरूरत नहीं। जितना
तुम्हें हैं, उतना ही मुझे अपने देश से प्यार हैं।
अगर मैंने हार भी स्वीकार कर ली, बहुत से लोग
फ्लोरिडा में और देश के अन्य भागों में नाखुश
होंगे। फ्लोरिडा में मशीन ने मत की गिनती बराबर
नहीं की हैं, और फ्लोरिडा के कायदे के मुताबिक मत
की गिनती हाथ से हो रही हैं। जॉर्ज, वो जीत कैसी
रहेगी जो बहुत ही थोडे से मत से बनी हुई है, और वो
भी शायद भूल से मिले हुए मत हैं? अपने लिये, और
देश के लिये, क्या वह अच्छा नही रहेगा कि हम
फ्लोरिडा में फिर से मशीन के बजाय हाथों से मत की
गिनती करें? एक या दो हफ्ते और लग गये तो इसमें
इतनी बुराई नहीं..."
जॉर्ज की गरमी चालू रही...
"आलबर्ट, कितनी दफे यह फ्लोरिडा के मत गिनना हैं?
वो मत जिस पेपर पर हैं वो भी फटा जा रहा होगा
अभी... हाथों से मत की गिनती? देखा नहीं, कितना
मुश्किल है यह काम... एक एक मत के पेपर को प्रकाश
के सामने रखकर गिननेवाले निर्णय दे रहे थे कि
मार्क इधर की तरफ छपा हुआ है या उधर... सब तमाशा
हो रहा हैं, आलबर्ट, देख नहीं सकते क्या? इस
शनिवार को फ्लोरिडा के जो लोग विदेश रहते हैं उनके
मत आ जायेंगे, वे भी गिन लिये जायेंगे, बस उसके
बाद और कोई गिनती नहीं होगी।"
जॉर्ज अपनी पसन्द के काऊबॉय बूट पहने हुए थे, और
अपनी बात बताते हुए जोर से अपने पाँव को जमीन से
टक्कर दी।
"यह जीत ऐसी होगी, जॉर्ज, जिसमें इतनी चमक नहीं
होगी। सुना है कि कभी कभी हार में भी जीत होती है।
मुझे हारने से कोई डर नहीं, मगर हम उस मकाम पर जा
पहुँचे है कि जहाँ किसी को भी हार स्वीकार करा
देना नामुमकिन सा बन गया हैं। सुनो, अगर तुम जीत
गये, और जीतने के बाद अगर मेरी सहायता की जरूरत
पड़ी, तो मैं जरूर हाजिर रहूँगा।"
"आलबर्ट, तुम्हारे बहुत से रूप देखें, यह रूप भी
अच्छा है। इतने बुरे नहीं तुम... देखो, अगर तुम
जीत गए तो मैं भी हाजिर रहूँगा, अगर मेरी जरूरत
पड़ी तो।"
"गॉड ब्लेस, अमेरिका... "
१५ नवम्बर २००० |