| घर-परिवार– बचपन की आहट |
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७- सामाजिक कौशल का विकास आपका शिशु सामाजिक हो या एकांतप्रिय, कुछ खेल शिशु के सामाजिक कौशल को विकसित करते हैं। छुप्पा-छुप्पी के खेल में शिशु खिलखिलाकर हँस उठेगा। चीज़ें अपने पालने से नीचे फेंकना और फिर आपको उन्हें उठाके लौटाते हुए देखना - यह आदान प्रदान शिशु को सिखाता है कि दूसरों से कैसे व्यवहार किया जाता है। शिशु के अच्छे व्यवहार पर ताली बजाकर आप उसको प्रोत्साहित कर सकते हैं। शिशु आपके ध्यान को सराहेगा। हर खेल खेलते समय ध्यान रखें कि शिशु को यह न बताएँ कि यह असुरक्षित है, कठिन है क्यों कि शिशु अभी उस समझ के लिये तैयार नहीं है। उसे केवल यह बताएँ कि देखों यह भी आसान है। जो चीज़ शिशु के लिये असुरक्षित है उसे स्वयं उससे दूर कर दें। जो चीज़ उसके लिये बहुत कठिन है उसके लिये बार बार प्रेरित कर के उसे असफलता में न डालें। ६- शिशु के साथ यात्रा
यदि आप शिशु के साथ कहीं जा रहे हैं या
यात्रा करने वाले हैं तो आपके लिए एक ही सलाह हैः "तैयार
रहें!" कुछ ज़रूरी वस्तुएँ शिशु के डाईपर-बैग में यात्रा के
समय हमेशा रखें - आसानी से खाए जा सकने वाले ढेर सारे
स्नैक्स जैसे नम्कीन मीठे बिस्कुट, चीज़लिंक्स आदि, दूध,
पानी, डाईपर, वाइप्स, ठंडे मौसम में एक स्वैटर, दो जोड़ी
साफ़ कपड़े (हो सकता है कभी शिशु के डाईपर से, या उल्टी
होने के कारण पकड़े गन्दे हो जाएँ), आपके लिए एक जोड़ी
कपड़े, आराम देनेवाली वस्तुएँ जैसे शिशु का कम्बल या कोई
खिलौना, और शिशु का ध्यान बाँटने के लिए कई चीज़ें जैसे
गत्ते की किताबें, छोटे खिलौने आदि। ५- भूख में कमी-
आश्चर्यचकित न हों यदि आपके खाते-पीते शिशु की भूख अचानक
से घट गई है। इस उम्र के बच्चों के लिए कम खाना और अपनी
पसंदीदा गिनी-चुनी चीज़ें खाना सामान्य बात है। ज़ाहिर है यह
आपको अजीब लगेगा। लेकिन क्योंकि शिशु अब उतनी तेज़ी से नही
बढ़ रहा है जितना अपने पहले साल में बढ़ रहा था इसलिए उसे
कम खाने की आवश्यकता है। आप यह तो नियन्त्रित नही कर सकते
कि शिशु कितना खाए लेकिन वह क्या खाए यह आपके हाथ में है।
उसे चुनाव के लिए पौष्टिक खाना ही दें। ४. भाषा के साथ सहयोग
शिशु अब ऐसी भाषा बोलने लगा है जिसे काफी हद तक समझा जा
सकता है। उसके एक शब्द के कई मतलब होते हैं। जिन शिशुओं को
सांकेतिक भाषा आती है वे उसमें माहिर हो गए हैं। कुल
मिलाकर शिशु का भाषा विकास तेज़ी से हो रहा है। माता पिता
का कर्तव्य बनता है कि वे दैनिक आधार पर शिशु के साथ
महत्त्वपूर्ण बातचीत बनाए रखकर शिशु के विकास में मददगार
साबित हों। शिशु के साथ बातें करने, खेलने, किताबें पढ़ने,
गाना गाने से शिशु के मानसिक, भावनात्मक, और सामाजिक विकास
में और सुधार आएगा।
३.
दूध में बदलाव २. दाँतो की देखभाल
पहले साल से ही शिशु को अपने दाँतों की
देखभाल करना सिखाना आवश्यक है। दो साल की उम्र तक
टूथ-पेस्ट का दैनिक प्रयोग आवश्यक नहीं है। आप साफ़ मुलायम
हल्के गीले कपड़े से दाँत साफ़ कर सकते हैं। जब आप यह कर
रहे हों तो एक टूथ-ब्रश शिशु के हाथ में भी पकड़ा दें ताकि
उसका ध्यान बँटा रहे। १- बेबी वाकर हाँ या ना
शिशु आने वाले कुछ हफ़्तो में अपने पैरों
पर चलने लगेगा। ऐसे समय में हन्हें वॉकर में न रखें। यह
उन्हे चलने के लिए हतोत्साहित करता है। इतना ही नही, शिशु
इसमें बैठ के सीढ़ियों के पास जा सकता है, या कोई हल्का
रैक अपनी ओर खींच सकता है जिससे सारा समान उसके ऊपर गिर
सकता है। इसलिए अमरीकन अकादमी ओफ़ पीडिएट्रिक्स सलाह देते
हैं कि वॉकर शिशु के लिए सुरक्षित नहीं होते। इन दिनों
शिशु को घर के अंदर नंगे पैर, मोज़ों के साथ, या फिर मुलायम
तल्ले वाले बच्चों के लिए खास बने जूते पहनने चाहिये। जब
बाहर जाएँ तब असली जूते पहनाए जा सकते हैं। |