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डाक टिकटों के संसार में कचनार
पूर्णिमा वर्मन

दाहिनी ओर दिए गए कांगो के टिकट में कचनार की बोहेनिया वेरियागाटा प्रजाति का नाम लिखा है। क्षेत्रफल के हिसाब से कांगो अफ्रीका महाद्वीप का तीसरा सबसे बड़ा देश है। टिकट पर लिखी गई भाषा से अंदाज़ लगाया जा सकता है कि इस देश की आधिकारिक भाषा फ्रांसीसी है। १ फ्रैंक वाले इस टिकट पर नीचे फ्रेन्च में उष्णकटिबंधीय पुष्प लिखा है। बायीं ओर प्रजाति का नाम है और दायीं ओर टिकट के जारी किए जाने का वर्ष १९७१ लिखा हुआ है। पूरे अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्र में बहुनिया की बोहेनिया वेरियागाटा और बोहेनिया मोनान्ड्रा प्रजातियाँ बहुतायत से पाई जाती हैं। यही कारण है कि कांगो, लीबिया, मोंत्सेरात कंबोडिया और सॉल्मन द्वीप के डाकटिकटों में इन्हीं को स्थान मिला है।

मोंटेसेराट कैरेबियन सागर में स्थित लीवार्ड द्वीप समूह में ब्रिटेन का सागर पार क्षेत्र के अंतरगत एक छोटा सा द्वीप है। साढ़े चार हज़ार की जनसंख्या वाला यह द्वीप प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। कचनार यहाँ के प्रमुख फूलों में से एक है। इसी कारण दिए गए चित्र में कचनार की एक झाड़ी और उसके फूलों के गुच्छे को दिखाया गया है। टिकट का मूल्य १५ सेंट हैं। यहाँ पश्चिम कैरेबियन डॉलर मुद्रा के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

गिनि बिसाउ पश्चिम अफ्रीका का एक देश है। इससे मिलते जुलते नाम का एक देश गिनि गणतंत्र इसके पास ही है। गिनी बिसाऊ की भाषा पुर्तगीज़ है और राजधानी बिसाऊ है। कचनार की बोहेनिया वेरियागाटा प्रजाति के चित्र वाला यह टिकट १९८३ में जारी किया गया था.। मुद्रा के स्थान नीचे ध्यान से देखें तो अंग्रेज़ी के "सी ओ आर आर ई आई सी एस (CORREICS)" अक्षर दिखाई देते हैं। यह इनकी डाक संस्था का संक्षेप है जिसका पूरा नाम है- इम्प्रेसा ब्राज़िलियेरा डि कोरियोस ए टेलीग्राफ़ोस, इसका अर्थ है ब्राजीलियन डाक व तार संस्थान। यह ब्राज़ील की राष्ट्रीय डाक सेवा है। हो सकता है गिनी बिसाउ के टिकट छापने का काम इसी संस्था के पास हो या यह संस्था गिनी बिसाऊ में भी डाक की ज़िम्मेदारी संभालती हो।

सितंबर १९८१ में भारत ने भी देश के प्रमुख पेड़ों के चित्रों से युक्त एक टिकट शृंखला जारी की थी। इसके चार टिकटों में अमलतास, पलाश, वरना और कचनार के अत्यंत सुंदर चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। ये चित्र भारत के दो प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़रों द्वारा खींचे गए हैं। अमलतास व कचनार के टिकटों पर के एम वैद द्वारा खींचे गए फ़ोटो हैं और पलाश व वरना के टिकटों पर राजेश बेदी द्वारा खींचे गए। टिकटों में बाईं ओर ऊपर मूल्य अंकित किया गया है और दाहिनी ओर दो भाषाओं में देश का नाम छापा गया है। चित्र के नीचे पेड़ का नाम और टिकट का प्रकाशन वर्ष अंकित किया गया है। मौसम की कड़ी मार सहकर भी खुशी से खिलने वाले इन बहुरंगे टिकटों की २० लाख प्रतियाँ जारी की गई थीं। लगभग ढाई से.मी. चौड़े और ३.५ से.मी. ऊँचे टिकटों के इस सेट के साथ एक प्रथम दिवस कवर भी जारी किया गया था जिसे सुहमिंदर सिंह ने डिज़ाइन किया था।

दाहिनी और स्थित कंबोडिया के टिकट में कचनार का एक और सुंदर चित्र प्रदर्शित किया गया है। कंबोडिया की वर्तनी पर ध्यान देने पर देखा जा सकता है इस पर देश के नाम की प्राचीन भारतीय ग्रंथों में प्रयुक्त वर्तनी कांबोज का प्रयोग किया गया है ना कि बुहेनिया अंग्रेज़ी वर्तनी का। सुदूर पूर्व में स्थित थाईलैंड के पास बसे इस देश की भारत के साथ सांस्कृतिक आदान प्रदान की ऐतिहासिक परंपरा पाई जाती है।

सॉल्मन आईलैंड द्वारा जारी किए गए उष्णकटिबंधीय देशों के वृक्षों की शृंखला में १९८७ में प्रकाशित २५ सेंट के इस टिकट पर बाएँ निचले कोने में बोहेनिया वेरियागाटा लिखा है।  बीच में कचनार का चित्र है बाएँ ऊपरी कोने पर देश का नाम है और दाहिने ऊपरी कोने पर राजचिह्न अंकित है। इसको १७ टिकटों के साथ जारी किया गया था जिसमें देश के सत्रह प्रमुख फूलों को प्रदर्शित किया गया था। नीले, गुलाबी और हरे रंग के इस टिकट पर किसी फ़ोटो को नहीं बल्कि एक कलाकृति को प्रदर्शित किया गया है। यह देश भी दक्षिण एशिया में पापुआ और गुयाना के पास प्रशांत महासागर में स्थित हैं और यहाँ की जलवायु कंबोडिया और इंडोनेशिया से काफ़ी मिलती जुलती है जिसके कारण यहाँ कचनार, के वृक्षों को पनपने का अच्छा अवसर मिलता है।

बारबाडोस से इस टिकट पर कचनार की बोहेनिया  ब्लेकियाना की एक झाड़ी और फूलों का एक गुच्छा चित्रित किया गया है। इस वृक्ष का बोहेनिया नाम १६ वीं शती के वनस्पति वैज्ञानिक भाइयों जोहानेस और कैस्पर बोहिन के नाम पर रखा गया है। इसकी दो हिस्सों वाली पत्तियाँ इन दो जुड़वाँ भाइयों की स्मृति ताज़ा करती हैं।

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१६ जून २००८

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