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अमलतास
विशेषांक समग्र
कहानियों में-
हास्य व्यंग्य में-
प्रकृति और पर्यावरण में-
टिकट संग्रह में-
संस्मरण में-
अनुभूति में-
सप्ताह का विचार
ऐ अमलतास किसी को भी पता न चला तेरे कद का अंदाज
जो आसमान था पर सिर झुका के रहता था, तेज़ धूप
में भी मुसकुरा के रहता था।
--मधूलिका गुप्ता |