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डॉक्टर की रात को अचानक नींद
खुली,
उसने देखा की उसका टॉयलेट पूरी तरह से ब्लाक हो गया है ।
उसने अपनी पत्नी से कहा- मैं अभी प्लम्बर को बुलाता हूं !
पत्नी ने कहा- तुम प्लम्बर को रात को तीन बजे मत बुलाओ ।
- मैं तो बुलाऊँगा, हम भी तो जाते हैं रात को अगर कोई मरीज बीमार हो जाए! उसने
प्लम्बर को फोन किया, शिकायत की और उस को रात को ही आने को कहा। प्लम्बर ने मना
किया तो डॉक्टर ने फिर से वही बात कही- अगर मैं रात को मरीज देखने जा सकता हूं तो
तुम क्यों नहीं आ सकते?
आधी रात को ३:३० बजे प्लम्बर आँखों को मसलता हुआ पहुँचा। डॉक्टर ने उसे ब्लाक
टॉयलेट दिखाया। प्लम्बर बाहर गया वहाँ अपने बक्से से उसने दो टैबलेट उठाईं टॉयलेट
में डालीं और डॉक्टर से कहा- हर आधे घंटे के बाद एक-एक बाल्टी पानी डालते रहना अगर
कोई फर्क नहीं पड़े तो सुबह फिर से मुझे कॉल करना हो सकता है कि एण्डोस्कोपी करना
पड़े। |
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१
दिसंबर २०२४ |
पत्नी आई.सी.यू में थी। पति का रो-रोकर बुरा हाल था।
डॉक्टर बोला, ‘हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, पर वह कुछ बोल ही नहीं रही है शायद कोमा
में है। अब तो सब कुछ भगवान के हाथ में है।
पति बोल उठा- ‘सिर्फ चालीस की ही तो है अभी...’
तभी पत्नी के होंठ हिले और आवाज आई- बत्तीस की
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१
नवंबर २०२४
- शशि पुरवार द्वारा प्रेषित |
चिंटू- एक बार 'बुरा न मानो होली है!' यह कहकर किसी
ने मुझ पर रंग फेंक दिया था...।
पिंटू- फिर तुमने क्या किया?
चिंटू- 'बुरा न मानो दिवाली है!' यह कहकर मैंने उस पर 'बम' फेंक दिया। आज पूरा
मोहल्ला मुझे ढूँढ रहा है...! |
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१
अक्टूबर २०२४ |
संता- जलेबी बेच रहा था मगर कह रहा था ‘प्याज ले लो
प्याज!
बंता- लेकिन यह तो जलेबी है।
संता- चुप हो जा वरना मक्खियाँ आ जाएँगी। |
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१
सितंबर २०२४ |
सबने बहुत समझाया लेकिन झक्कू भाई न माने और उस
पाकिस्तानी लड़की फसीना से शादी कर ही ली। सबकुछ खुशी-खुशी चल रहा था। सालभर बाद
उनके घर एक चाँद से बेटे ने जन्म लिया। जब वो स्कूल जाने लगा तो एकदिन झक्कू भाई
अपने दरवाजेपर उदास बैठे मिले। पड़ोसी ने पूछा
"क्या झक्कू, सब ठीक है न?"
झक्कू बोला, "हाँ भैया, अच्छा ही है, बस बेटे के कारण जरा सा परेशान हूँ। वो जब भी
हमसे नाराज होता है तो घर के किसी कोने में सुतली बम फोड़ आता है।" |
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१
अगस्त २०२४
- कुमार गौरव अजीतेन्दु द्वारा प्रेषित |
एक गुंडा हेयर कटिंग और शेविंग के लिये सैलून में गया
और नाई से बोला, "अगर मेरी कटिंग शेविंग ठीक से बिना कटे-छिले हुई तो मुँह माँगा
दाम और इनाम भी दूँगा, लेकिन कहीं ज़रा भी कट-छिल गया तो गर्दन उड़ा दूँगा।”
डर के मारे सैलून के सभी नाइयों ने मना कर दिया।
अंत में वह गुंडा एक गाँव के नाई के पास पहुँचा जहाँ एक नया लड़का ही था। उसने शर्त
सुनकर कहा, "ठीक है बैठो मैं बनाता हूँ।" उस लड़के ने काफी बढ़िया तरीके से गुंडे
की हेयर कटिंग और शेविंग कर दी। गुंडे ने खुश होकर लड़के को दस हजार रुपया दे दिया
और पूछा, "तुझे अपनी जान जाने का डर नहीं था क्या?"
लड़के ने कहा, "डर? डर कैसा? पहल तो मेरे हाथ में ही थी।
गुंडे ने कहा, “पहल तुम्हारे हाथ में थी” का मतलब नहीं समझा।
लड़के ने हँसते हुए कहा, "उस्तरा तो मेरे हाथ में ही था। अगर आपको खरोंच लग भी जाती
तो मैं तुरंत आपकी गर्दन काट देता।" |
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१
जुलाई २०२४ |
गणित के दो विद्यार्थी मौखिक परीक्षा के लिये तैयार
बैठे थे। पहले का नंबर आया और वह अंदर गया।
परीक्षक- यदि आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हो, और अचानक आपको गरमी लगे तो आप क्या
करेंगे?
विद्यार्थी- मैं खिड़की खोलूँगा।
परीक्षक- बहुत खूब, अब ये बताओ कि अगर उस खिडकी का क्षेत्रफल एक दशमलव पाँच वर्ग
मीटर है, डिब्बे का घनफल १२ मी है, और ट्रेन ८० किलो मीटर प्रति घंटा से पश्चिम
दिशा की ओर जा रही है, और वायु का गति वेग 5 मील प्रति सेकेंड पूर्व की ओर है तो
डिब्बा कितने समय में ठंडा होगा??
वह विद्यार्थी ने कोई उत्तर नही दे पाया और वो फेल हो गया। बाहर आकर उसने अपने
मित्रों को वह प्रश्न बताया। अब दूसरे विद्यार्थी की बारी आई।
परीक्षक- मान लो आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हो, और अचानक आपको गरमी लग रही है, तब
आप क्या करोगे??
दूसरा विद्यार्थी- मैं अपना कोट निकालकर अलग रख दूँगा।
परीक्षक- फिर भी गर्मी हो रही है, तो फिर ?
विद्यार्थी- मैं शर्ट उतार दूँगा।
परीक्षक- अरे फिर भी गरम हो रहा हो तब क्या करोगे?
विद्यार्थी- मैं बनियान भी उतार दूँगा।
परीक्षक- फिर भी गर्मी लग रही है तो?
विद्यार्थी- गरमी से मर जाऊँगा लेकिन खिड़की नहीं खोलूँगा। |
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१
जून २०२४ |
श्यामलाल जी अपनी बाइक से ऑफिस जा रहे थे और आगे एक
लड़की भी अपनी स्कूटी से चल रही थी। वह लड़की अचानक दाहिनी ओर मुड़ गयी, श्यामलाल
जी की बाइक उसकी स्कूटी से टकरा गयी।
श्यामलाल जी ने कहा- बेटे, कम से कम हाथ या इंडिकेटर तो देना चाहिये।
उसने जवाब दिया- अंकल, मैं तो रोज ही यहाँ से दाहिने मुड़ती हूँ, आप शायद नये हो! |
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१
मई २०२४ |
मंदिर में पप्पू ने कहा- पंडितजी, कोरोना वायरस से
बड़ा डर लग रहा है। क्या करना चाहिए? इस पर
पंडित- डरने की बात नहीं है, हाथ आगे करो।
पप्पू- पंडितजी, आज चरणामृत थोड़ा कड़वा नहीं है?
पंडित- अरे मूर्ख, वह सैनेटाइजर था, सफाई के लिए दिया था। |
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१
अप्रैल २०२४ |
एक पड़ोसी दूसरे पड़ोसी से- भई, आज ऐसी चाय पिलाओ, जिसे पीकर मन झूम
उठे और बदन नाचने लगे।
दूसरा पड़ोसी- भई, हमारे यहाँ भैंस का दूध आता है, नागिन का नहीं। |
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१
मार्च २०२४ |
दिग्विजय सिहं: भईया, भिण्डी कैसे दी ?
दुकानदार: साब, साठ रुपये किलो।
दिग्विजय: ठीक तो है न?
दुकानदार:फिक्र न करो साब, एकदम टंच माल है।
राहुल बाबा: भईया, भिण्डी कैसे दी?
दुकानदार: बेटा भिण्डी तो साठ रुपये किलो है मगर जिधर तुम इशारा कर रहे हो वो
भिण्डी नहीं, हरी मिर्च है।
फारुख अब्दुल्ला : भइया भिंडी कैसे दी?
दुकानदार : सौ रुपए किलो।
फारुख अब्दुल्ला : एक किलो दे दो, सौ लोगो का पेट भरना है।
मनमोहन सिंह : भइया भिंडी कैसे दी?
दुकानदार : मुफ्त मे ले लो, आज आपकी आवाज पहली बार सुनाई दी है। |
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१
फरवरी २०२४ |
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एक पति-पत्नी को डाक से नयी फिल्म
का टिकट मिला। टिकट के साथ एक कागज था जिस पर लिखा था- यह उपहार आपके लिये विशेष
रूप से भेजा जा रहा है। जल्दी ही आपको पता चलेगा कि इसे किसने भेजा है।
पति पत्नी खुश होकर नयी फिल्म देखने चले गए। जब आधी रात को घर लौटे तो देखा कि घर
की पूरी तरह सफाई हो चुकी है।
मेज पर एक कागज पड़ा था जिस पर लिखा था- अब पता चला कि उपहार किसने भेजा था? |
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१ जनवरी २०२४ |