एक सीडी मेरे पास भी है।
इस सीडी को मैंने बहुत सँभाल कर रखा है। इतना सँभाल कर तो
मैंने अपनी शादी से पहले के प्रेम पत्र भी नहीं रखे, जितना
इस सीडी को रखा है। गाहे-बेगाहे मैं यह चेक करता रहता हूँ
कि सीडी मेरी गिरफ़्त में ही है न! कहीं विरोधियों के हाथ
तो नहीं लग गई?
मुझे विरोधियों के
षडयंत्रों से बहुत डर लगता है। क्या पता, कौन-सा विरोधी कब
यह ख़बर लीक कर दे कि मेरे पास भी एक सीडी है। आजकल चुनाव
आयोग वैसे भी सीडियों के मामले पर बड़ी पैनी नज़र रखे है।
बीवी की नज़र से बचना आसान हो सकता है लेकिन चुनाव आयोग की
नज़र से बचना बहुत मुश्किल है। चुनाव आयोग जब हरकत में आता
है तो बड़े-बड़ों की पाजामे की गाँठें ढीली हो जाती हैं।
मेरे पास सीडी होने की ख़बर अगर किसी दिलजले ने चुनाव आयोग
तक पहुँचा दी तो आयोग इस बात का कड़ा नोटिस लेते हुए मुझे
नोटिस भी जारी कर सकता है। मुझे नोटिसों से बहुत डर लगता
है। चुनाव आयोग ने अगर मुझ से पूछ लिया कि मैंने यह सीडी
किसलिए बनवाई थी और किसलिए छुपा कर रखी थी, तो मैं क्या
जवाब दूँगा? मेरे पास कोई अपना थिंक टैंक भी नहीं है जो
मुझे यह बताए कि चुनाव आयोग के डंडे का किस तरह अपने लिए
फ़ायदा उठाया जा सकता है।
मैं अगर किसी तयशुदा
रणनीति के तहत सीडी प्रकरण पर गिरफ़्तारी देने गया और
सचमुच में गिरफ़्तार कर लिया गया तो मेरी ज़मानत कौन देगा?
अगर पुलिस ने मुझे अंदर ठोक दिया तो मेरी गृहस्थी का क्या
होगा? बाल-बच्चों का क्या होगा? घर का खर्चा कैसे चलेगा?
नौकरी कैसे बचेगी?
मैं कोई छुट्टभैया लेबल
का नेता भी नहीं हूँ। इतना डर तो मुझे दो नंबर का काम करते
हुए नहीं लगता जितना गिरफ़्तारी का लगता है। चलो मान लो,
पुलिस मुझे गिरफ़्तार नहीं करती है लेकिन चुनाव आयोग मेरी
मान्यता रद्द कर देता है तो मैं अपनी बीवी के पास कौन-सा
मुँह लेकर जाऊँगा? वह मुझे यह भी कह सकती है कि अब हिमालय
की गुफ़ाओं में साधना करने चले जाओ क्योंकि तुम्हारी
मान्यता रद्द हो चुकी है और मान्यता रद्द होने के बाद अगर
तुम इसी घर में रहोगे तो समाज हमारे बारे में क्या सोचेगा?
मुझे कई दूसरी तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता
है।
वैसे मेरी इस सीडी में
ऐसा-वैसा कुछ भी नहीं है। यह सीडी भी मैंने खुद तैयार न
करके पेमेंट बेस पर तैयार करवाई थी। इस सीडी में किसी की
धार्मिक भावनाओं को ठेस भी नहीं पहुँचाई गई है और न ही
सांप्रदायिक उन्माद फैलाकर मैंने अपना कोई उल्लू सीधा करना
चाहा है। मैंने इस सीडी की कोई डुप्लीकेट कॉपियाँ भी
बनवाकर जनता में नहीं बँटवाई। सीडी जैसी भी है और जिस भी
हालत में है, अभी तक मेरे पास सुरक्षित है। मैंने अपने
क़रीबी दोस्तों को भी कभी यह नहीं बताया कि मेरे पास भी एक
सीडी है। हालाँकि अपने दोस्तों द्वारा मुहैया करवाई गई कई
सीडियाँ मैं छिप-छिपा कर देख चुका हूँ।
खुदा न खास्ता, मेरे पास
भी कोई सीडी होने की भनक चुनाव आयोग को लग गई और मीडिया के
ज़रिये सारे देश की जनता के साथ-साथ मेरे दोस्तों को भी
पता चल गया कि मेरे पास भी एक सीडी थी तो दोस्त मेरे बारे
में क्या सोचेंगे? मैं किस-किस को स्पष्टीकरण देता फिरूँगा
कि मैंने यह सीडी क्यों रखी थी? मेरी तो कोई राजनीतिक
महत्वाकांक्षा भी नहीं है और न ही किसी वोट बैंक पर मेरी
कभी नज़र रही है। मैं किसी नेता के प्रलोभन में आकर अपना
वोट बेच तो सकता हूँ लेकिन मैं इस तरह की टुच्ची राजनीति
में यकीन नहीं रखता। फिर भी चुनाव आयोग ने मुझे सीडी
प्रकरण में उलझा दिया और ख़्वामख़्वाह रगड़ा लगा दिया तो
मैं क्या करूँगा?
हालाँकि मेरे पास जो सीडी
है, उसमें किसी लीडर की खरमस्तियाँ भी नहीं दिखाई गईं,
किसी को प्रश्न पूछने के एवज़ में रिश्वत लेते भी नहीं
दिखाया गया और न ही अंडर-वर्ल्ड के साथ किसी राजनीतिज्ञ या
फ़िल्म अभिनेता के रिश्ते दिखाए गए हैं, फिर भी विरोधियों
की साज़िश का क्या पता चलता है? क्या पता कौन-सा विरोधी
मेरी सीडी में छेड़छाड़ करके उसे आपत्तिजनक बना दे, उसे
सांप्रदायिक रंगत दे दे और समाज का बँटा-धार करने वाले लोग
अपने मक़सद में कामयाब हो जाएँ।
मैं इस मामले में कोई
रिस्क न लेते हुए यह साफ़-साफ़ बता देना चाहता हूँ कि जिस
सीडी को मैंने बरसों से सँभाल कर रखा है, उस सीडी में असल
में मेरे सात फेरों के दृश्य कैद हैं। क्या मैं इस सीडी को
हिफ़ाज़त से भी नहीं रख सकता?
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सितंबर 2007 |