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बतरस से लिखवट - अजब गजब चट्टानें                              मुल्लम मुल्लम क्रीक

मुल्लम मुल्लम क्रीक की पैदल की वापसी हमने उसके दूसरे किनारे से की। काफी दूर तक आने के बाद इस तरफ का ट्रैक खतम हो गया। क्रीक पार करने का पुल काफी पीछे था। वहीं पर पास में पानी में पत्थर दिखे और संदीप को लगा कि अगर कुछ हिम्मत की जाए तो बिना वापसी के क्रीक पार हो सकती है।

बस संदीप ने हिम्मत जुटाई और क्रीक पार कर ली। उसकी देखा देखी में, मैं भी उसकी मदद से क्रीक के दूसरी तरफ पहुँच ही गया। चित्र में पत्थरों से पटा हुआ क्रीक का वो हिस्सा जो हम लोगों ने पार किया था। क्या तो हिम्मत दिला दी संदीप ने कल। इस तरह ये चट्टानें बनी हमारे सफर की सहायक।

- रतन मूलचंदानी
१ मार्च २०२६

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