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व्यक्तित्व

अभिव्यक्ति में
अमृतलाल नागर की रचनाएँ

गौरवगाथा में
लखनवी होली

 

 

अमृतलाल नागर


जन्म- १७ अगस्त १९१६, आगरा (उत्तर प्रदेश) में एक गुजराती नागर ब्राह्मण परिवार में, लेकिन कर्मभूमि लखनऊ रही।
शिक्षा- हाईस्कूल तक औपचारिक शिक्षा के बाद स्वाध्याय से ज्ञानार्जन किया।

कार्यक्षेत्र-
उन्होंने पत्रकारिता, फिल्म पटकथा लेखन (१९४०-१९४७), और आकाशवाणी लखनऊ में ड्रामा प्रोड्यूसर (१९५३-१९५६) के रूप में कार्य किया। उनकी भाषा सहज, सरल और दृश्य के अनुकूल है, जिसमें मुहावरों, लोकोक्तियों, और देशज शब्दों का सजीव प्रयोग मिलता है। उनकी रचनाओं में भावात्मक और वर्णनात्मक शैली प्रमुख है। प्रमुख विधाएँ हैं- उपन्यास, कहानी, नाटक, रिपोर्ताज, संस्मरण, और बाल साहित्य।

प्रमुख कृतियाँ-
उपन्यास- बूँद और समुद्र, मानस का हंस, अमृत और विष (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त, खंजन नयन, नाच्यौ बहुत गोपाल।
कहानी संग्रह- वाटिका, तुलाराम शास्त्री, एटम बम, पीपल की परी।
व्यंग्य संग्रह- सेठ बाँकेमल, कृपया दाएँ चलिए, भरत पुत्र नौरंगीलाल, चकल्लस आदि।
नाटक- युगावतार, अँधेरे और उजाले।
संस्मरण- जिनके साथ जिया।

सम्मान और पुरस्कार:
साहित्य अकादमी पुरस्कार (१९६७): अमृत और विष के लिए।
पद्म भूषण (१९८१): भारत सरकार द्वारा सम्मानित।
अन्य: भारत भारती सम्मान, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, प्रेमचंद सम्मान।

निधन २३ फरवरी १९९० को हुआ

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