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प्रेरक प्रसंग

बादलों की हड़ताल

एक बार बादलों की हड़ताल हो गई बादलों ने कहा अगले दस साल पानी नहीं बरसाएँगे। ये बात जब किसानों ने सुनी तो उन्होंने अपने हल वगैरह बाँधकर के रख दिये लेकिन एक किसान अपने नियमानुसार हल चला रहा था।

कुछ बादल थोड़ा नीचे से गुजरे और किसान से बोले क्यों भाई पानी तो हम बरसाएँगे नहीं फिर क्यों हल चला रहे हो? किसान बोला कोई बात नहीं जब बरसेगा तब बरसेगा लेकिन मैं हल इसलिए चला रहा हूँ कि मैं दस साल में कहीं हल चलाना न भूल जाऊँ।

अब बादल भी घबरा गए कि कहीं हम भी बरसना न भूल जाएँ। तो वो तुरंत बरसने लगे और उस किसान की मेहनत जीत गई। जिन्होंने खेती के औजार बंद करके रख दिये थे, वे हाथ मलते ही रह गए।

सो लगे रहो भले ही परिस्थितियां विपरीत हों, लेकिन आने वाला समय निःसंदेह हमारे लिये अच्छा होगा। क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत करना नहीं छोड़ते हैं। एक कहावत है- जो पानी से नहाते है वो परिधान बदल सकते हैँ, लेकिन जो पसीने से नहाते हैं वो इतिहास बदल सकते हैं। हमे भी संघर्ष जारी रखना है।

१ जुलाई २०२६

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