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जयपुर में हिन्दी वेब पत्रकारिता पर संगोष्ठी-

हिंदी वेब पत्रिका 'इंद्रधनुष इंडिया' के प्रकाशन का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ की जयपुर इकाई ने वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के खखाखच भरे सभागार में 'हिंदी वेब पत्रकारिता' विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया।

चर्चा में भाग लेते हुए युवा पत्रकार, डेली न्यूज़ के संपादक राम कुमार सिंह ने समाज में बढ़ती जा रही कंप्यूटर की तीव्र पैठ की चर्चा करते हुए कहा कि आज इंटरनेट साहित्य का डी.टी.एच. (डाइरेक्ट टू होम) बन गया है। रामकुमार की ही बात को आगे बढ़ाया कथाकार रतन जांगिड ने। उनका का विचार था कि भविष्य वेब पत्रिकाओं का ही है।

विचारक राजाराम भादू ने इंटरनेट की चर्चा करते हुए भादू ने कहा कि समकालीन जीवन की हलचलें इस पर सर्वाधिक हैं। वेब पत्रिका के संदर्भ में उनका विचार था कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे दुनिया के किसी भी कोने में पढ़ा जा सकता है। 'इद्रधनुष इंडिया' की चर्चा करते हुए उन्होंने सलाह दी कि इस वेब पत्रिका को अपनी प्रकृति निश्चित करनी चाहिए ताकि उस प्रकृति के पाठक इसे अपने लिए अपरिहार्य मानने लगें।

गोष्ठी के अगले वक्ता थे वेब पत्रकारिता के पुरोधा और भास्कर समूह की लोकप्रिय पत्रिका 'अहा ज़िंदगी' के संपादक यशवंत व्यास। अपनी अप्रतिम शैली में श्रोता समुदाय को सम्मोहित करते हुए यशवंत ने पहले तो तकनीक के अनेक चमत्कारों और इसके फैलाव की चर्चा की और फिर कहा कि जहाँ गंभीरता का अभाव होता है वहाँ अराजकता भी अपने आप चली आती है। आज ब्लॉग जगत में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने सलाह दी कि हमें तकनीक की ताक़त का इस्तेमाल अपनी बात कहने के लिए करना चाहिए।

विमर्श के अंतिम वक्ता थे सुपरिचित वरिष्ठ कवि और दूरदर्शन केंद्र जयपुर के निदेशक नंद भारद्वाज। तकनीक के इस्तेमाल की ही बात को आगे बढ़ाते हुए आपने कहा कि यह बात सारे ही माध्यमों पर लागू होती है कि तकनीक का इस्तेमाल कौन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तो यही होना चाहिए कि हम तकनीक का अधिकाधिक इस्तेमाल मनुष्यता के हित में करें। अपने कार्य क्षेत्र से अनेक उदाहरण देते हुए आपने कहा कि तकनीक समय बचाती है और आपको अधिक तीव्रता से काम करने की क्षमता प्रदान करती है। हिंदी की साहित्यिक वेब पत्रकारिता की चर्चा करते हुए उन्होंने सलाह दी कि सभी साहित्यिक पत्रिकाओं को अपनी समानधर्मा पत्रिकाओं की सूचना प्रकाशित करनी चाहिए ताकि इनका अधिकाधिक प्रसार हो। उनका एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी था कि वेब पत्रिकाओं को केवल पाठ्य सामग्री तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें मल्टी मीडिया बनना चाहिए, जैसे किसी मुद्रित कविता के साथ उसके पाठ का श्रव्य (ऑडियो) क्लिप भी हो और किसी कहानी या नाटक के साथ उसके मंचन का वीडियो भी हो। इससे माध्यम का प्रभाव बढ़ेगा।

गोष्ठी के प्रारंभ में वेब पत्रिका 'इंद्रधनुष इंडिया' की प्रबंध संपादक अंजलि सहाय ने अतिथिगण का स्वागत करते हुए इस पत्रिका के जन्म की अंतर्कथा बताई। आपका कहना था कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की माँग पर हमने अपनी पत्रिका में बाल-गीत भी दिये ताकि बच्चों के लिए सामग्री तलाश करते-करते उनके अभिभावक भी साहित्य से जुड़ें। पत्रिका के संपादक डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने अपनी संपादकीय दृष्टि से अवगत कराते हुए बताया कि हम लोग बहुत जटिल और गरिष्ठ साहित्यिक रचनाओं से गुरेज करते हैं क्योंकि हमारा उद्देश्य साहित्य को विशाल जन समुदाय तक ले जाना है। इंद्रधनुष इंडिया को राजस्थान की पहली हिंदी वेब पत्रिका कहे जाने के संदर्भ में उनका कहना था कि यद्यपि यह सच है कि 'इंद्रधनुष इंडिया' अब तक भी प्रांत की एक मात्र वेब पत्रिका है, किंतु उन्हें तो खुशी तब होगी जब राजस्थान से अगणित वेब पत्रिकाएँ निकलने लगेंगी, ठीक उसी तरह जिस तरह कभी यहाँ से खूब सारी लघु पत्रिकाएँ निकला करती थीं। उनकी प्रतिस्पर्धा ही उनकी गुणवत्ता का कारण बनेगी।

इस अवसर पर श्रीमती कमलेश माथुर की नव प्रकाशित पुस्तक 'वन्य जीवन की लोककथाएँ' का लोकार्पण भी किया गया।

गोष्ठी का संचालन प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव सुपरिचित कवि प्रेमचंद गांधी ने किया। प्रारंभ में प्रगतिशील लेखक संघ की जयपुर इकाई के अध्यक्ष जाने-माने कवि गोविंद माथुर ने स्वागत किया और अंत में कृतज्ञता ज्ञापन किया कवि ओमेंद्र ने। गोष्ठी में दिवंगत विचारक-दार्शनिक प्रो. दयाकृष्ण और लेखक लक्ष्मी मल्ल सिंघवी के निधन पर शोकांजलि भी दी गई। विषय की नवीनता और प्रासंगिकता तथा वक्ताओं के सारगर्भित वक्तव्यों के कारण यह गोष्ठी लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

विवरण: डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
24 अक्तूबर 2007

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