मुखपृष्ठ

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP            पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


देशांतर
विदेशी लेखकों की
हिन्दी कहानियों का संग्रह

समकालीन हिन्दी कहानियों के स्तंभ में इस माह प्रस्तुत है मारीशस से अभिमन्यु अनत 'शबनम' की कहानी- ज़हर और दवा।


जब मैंने पिता को यह कहते सुना कि सोफ़िया हमारे यहाँ आकर घर के कामों को संभाल लेगी, उस समय मुझे हैरानी तो तनिक भी नहीं हुई, लेकिन मैं उस बात पर काफी देर तक सोचता ही रह गया था।
मेरी माँ को अस्पताल में दाखिल हुए आज तीसरा दिन था। उससे दो दिन पहले से ही मेरी बहन चचेरी बहनों के साथ समुद्र किनारे बंगले पर सर्दी की छुट्टियाँ बिता रही थी। हमारे घर के कामों को संभालने के लिए किसी व्यक्ति की ज़रूरत थी, इस बात को मैं पिता से अधिक समझता था। शहर में जहाँ हम रहते हैं, नौकरानियों की कमी नहीं थी, फिर भी सोफ़िया हमारे घर आ रही थी, इस बात से, जैसे कि मैं ऊपर कह आया हूं, मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। इस प्रश्न को गौर से सोचते हुए मैं यह मान लेने को विवश था कि मेरे पिता को यह गवारा नहीं कि हाथ आया मौका यों ही चला जाए।

सोफिया को लेकर हमारे घर में काफी झमेला खड़ा हो चुका था। मेरी माँ के पास बात का कोई प्रमाण नहीं था, फिर भी वह सोफिया को मेरे पिता की रखैल मानती थी। नौबत यहाँ तक आ गयी थी कि मेरी माँ ने गठरी संभालते हुए पिता से कहा था कि दो में से एक यहाँ रहेगी। अगर वह रहती है तो सोफिया वाले नाटक की समाप्ति हो जानी चाहिए और अगर सोफिया वाला यह खेल खतम नहीं होता, तो वह इस घर में पल भर के लिए भी रहना पसंद नहीं करेगी।

पृष्ठ

आगे-

अपनी प्रतिक्रिया  लिखें / पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसारहिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।

 

hit counter