1
  पुरालेख तिथि-अनुसार
   //   पुरालेख विषयानुसार //  फेसबुक पर   

 लेखकों से // तुक कोश // शब्दकोश // पता-


१. ५. २०२२

इस माह-

अनुभूति में- गीतों में डॉ. प्राची, दोहों में देवेश दीक्षित देव, अंजुमन में सतपाल ख्याल, छंदमुक्त में शशिकांत गीते,  और दिशांतर में हरिहर झा की कविताएँ।

कलम गही नहिं हाथ-

दुबई आज विश्व के सबसे जगमग शहरों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जून १८३३ में जब इसकी स्थापना हुई ...आगे पढ़ें

घर-परिवार में

रसोईघर में- हमारी रसोई संपादक शुचि अग्रवाल प्रस्तुत कर रही हैं, गर्मी के मौसम में तरावट देने वाली करी- लौकी पोस्तो।

बागबानी में- बारह पौधे जो साल-भर फूलते हैं इस शृंखला के अंतर्गत इस माह प्रस्तुत है- बोगनविला की देखभाल।

स्वाद और स्वास्थ्य में- स्वादिष्ट किंतु स्वास्थ्य के लिये हानिकारक भोजनों की शृंखला में इस माह प्रस्तुत है- सफेद चीनी के विषय में।

जानकारी और मनोरंजन में

गौरवशाली भारतीय- क्या आप जानते हैं कि मई महीने में कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से 

वे पुराने धारावाहिक- जिन्हें लोग आज तक नहीं भूले और अभी भी बार-बार याद करते हैं इस शृंखला में जानें रामायण के विषय में।

वर्ग पहेली-३४९
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और रश्मि आशीष के सहयोग से

हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

साहित्य-और-संस्कृति-में

समकालीन कहानियों में इस माह प्रस्तुत है
भारत से तरुण भटनागर की कहानी- ढँकी हुई बातें

उस रोज जब बीजू आया, मैं पहले पहल उसे पहचान नहीं पाया। मैं उसके इस तरह आने के लिये तैयार नहीं था। ऐसा कोई कारण भी नहीं था कि वह दुबारा आता। वह भी पूरे बारह सालों के बाद एक दिन अचानक। पर ऐसा भी नहीं सोचा था कि वह इतना विस्मृत हो जाएगा कि वह मेरे सामने खड़ा हो और मैं कुछ क्षणों को उलझ जाऊं कि वह कौन है? उस दिन तेज गर्मी पड़ रही थी। वह शायद देर तक बाहर खड़ा रहा था। कॉलबेल खराब हो गई थी और कुंडी खड़खड़ाने की आवाज़ कूलर की आवाज़ में गुम हो गई थी।
"क्यों डाल दिया न चक्कर में ...।"

मैं उसे पहचानने के असमंजस में था। पर उसकी सहजता ने मुझे सतर्क कर दिया। मैं उसे पहचाने बिना मुस्कुरा दिया।
"क्यों भूल गए।"
"तुम, अरे ...।"
"मुझे बीजू कहते हैं।"
"अरे यार तुम भी ...।"
आगे...

***

स्वामी अड़गकड़ानंद का प्रेरक प्रसंग
राजा भर्तृहरि और जलेबी
***

प्रकृति-और-पर्यावरण-में-जानें
बढ़ती गर्मी और इसे रोकने के प्रयत्

***

मृदुला गर्ग की कलम से
मंच पर तिलिस्म है बुनराकु

***

डॉ. निशांत कुमार का दृष्टिकोण-
ये लाल रंग
.

पिछले अंकों से- जलेबी रचनाएँ

कहानियों में-

bullet

चमड़े का अहाता
- दीपक शर्मा

bullet

दूध जलेबी
- शार्दूला नोगजा

व्यंग्य में-

bullet

स्व. भोलागुरु रसासिक्त साहित्य मंडल - डॉ. शिव शर्मा का व्यंग्य

bullet

नेता जी का भाषण
- शशि पुरवार

bullet

बाजार में निकला हूँ
शंभुनाथ सिंह

लघुकथाओं में-

bullet

जलेबी
- राहुल देव

bullet

रसीद
- वृंदावनलाल वर्मा

bullet

श्राद्ध खाने नहीं आऊँगा कौआ बनकर
- अज्ञात

संस्मरण में-

bullet

जलेबी बनाम रसभरी
- डॉ. प्रणव भारती

bullet

लंगड़ साव की जलेबी
- आनंद वर्धन

bullet

पश्चिम की दीवानी दुनिया डलास के किस्से - अतुल अरोरा

bullet

फोन बजता रहा
- कृष्णा सोबती

bullet

जलेबी की विदेश यात्रा
मधु सोसि

अन्य लेखों में-

bullet

हमारी संस्कृति की पहचान जलेबी
- पूर्णिमा वर्मन

bullet

जलेबी सैर को चली
- सुब्बा राव

आज सिरहानेउपन्यास उपहार कहानियाँ कला दीर्घा कविताएँ गौरवगाथा पुराने अंक नगरनामा रचना प्रसंग पर्व पंचांग घर–परिवार दो पल नाटक परिक्रमा पर्व–परिचय प्रकृति पर्यटन प्रेरक प्रसंग प्रौद्योगिकी फुलवारी रसोई लेखक विज्ञान वार्ता विशेषांक हिंदी लिंक साहित्य संगम संस्मरण
चुटकुलेडाक-टिकट संग्रहअंतरजाल पर लेखन साहित्य समाचार साहित्यिक निबंध स्वास्थ्य हास्य व्यंग्यडाउनलोड परिसर

© सर्वाधिकार सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
यह पत्रिका प्रत्येक माह के पहले सप्ताह मे प्रकाशित होती है।

प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|-
सहयोग : रतन मूलचंदानी

Google
Search WWW Search www.abhivyakti-hindi.org