सारे जहाँ से अच्छा
हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी
वो गुलिस्तां हमारा

परबत वो सबसे ऊँचा
हमसाया आसमां का
वो संतरी हमारा
वो पासबां हमारा

गोदी में खेलती हैं
जिसके हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिसके दम से
रश्क–ए–जिनां हमारा

मज़हब नहीं सिखाता
आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम, वतन है
हिन्दोस्तां हमारा

— मुहम्मद इक़बाल

 

 


सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

हिंदू हो या मुसलमां, कह दो इन मुखलिफ़ों से
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा

रामप्रसाद बिस्मिल

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