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घर परिवार - गपशप


सुबह के नाश्ते को सलाम
- अर्बुदा ओहरी
 


त्योहारों का मौसम, व्यस्तताएँ, भागदौड़ और थकान का बुरा हाल ऐसे में सुबह के नाश्ते का समय कहाँ? पर सुबह का नाश्ता शरीर को सबसे अधिक ऊर्जा देता है और भोजन का सम्बन्ध शरीर से उतना ही गहरा है जितना कि कार्य का ऊर्जा से। ठीक ढँग से किया गया पौष्टिक सुबह का नाश्ता शरीर को सही ऊर्जा प्रदान करता है।

पौष्टिक नाश्ते का अर्थ गरिष्ठ भोजन नहीं

सुबह उठते ही हमारे दिमाग में दिनचर्या को लेकर ढेर सारी उथल पुथल शुरू हो जाती है। क्या कपड़े पहनने हैं, आज जरूरी मीटिंग तो नहीं है, रिपोर्ट तैयार है या नहीं आदि आदि। इस सारी ऊहापोह के बीच नाश्ते पर नजर डालना कुछ तर्कसंगत सा नहीं लगता। इसलिए नाश्ता प्राय: प्राथमिकता में नहीं आता है। पर जैसे जैसे दिन बढ़ने लगता है शरीर को ऊर्जा की माँग होने लगती है तब हम कुछ ऐसा ढूँढते हैं जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जा मिल सके और जो आसानी से भी मिल जाए जैसे काफी पी लेना, चाकलेट खा लेना या फिर जंक फूड। ऐसे खाने से हमें तुरंत ऊर्जा तो मिल जाती है पर यह ऊर्जा जल्दी ही खत्म भी हो जाती है और हमें फिर से कुछ खाने की जरूरत महसूस होने लगती है। बार बार खाना खाने की ऐसी जरूरत से हमें प्राय: झुँझलाहट सी हो जाती है। आखिर शरीर को भी तो कार्य करने के लिए इंर्धन की आवश्यकता होती है। यदि घर से संतुलित नाश्ता करके निकला जाए तो यह शरीर को स्फूर्त रखेगा ही मन को भी दिनभर स्फूर्ति का आभास रहेगा।

हम रात को भोजन करके सो जाते हैं। सोते समय भी हमारा शरीर और मस्तिष्क कार्यरत रहता है यानि सोते समय भी कुछ मात्रा में ऊर्जा खर्च होती है। शरीर की मरम्मत में, भोजन पचाने में, श्वास लेने आदि कार्यों में ढेर सारी ऊर्जा लग जाती है। परंतु यदि आप सुबह केवल एक कप चाय या काफी से उस खपत हुई ऊर्जा की पूर्ति करते हैं तो इसका मतलब आप अपने शरीर को जरूरी पोषक नहीं दे रहे। रात के भोजन के बाद सुबह तक हमारा एक तरह से व्रत हो जाता है सुबह का नाश्ता यह व्रत तोड़ता है। यह सब जानते हुए भी हम नाश्ते को महत्व नहीं देते क्योंकि हम जल्दी में होते हैं।

तो फिर सुबह का सही नाश्ता है क्या?

सबसे पहली बात तो यह कि सुबह के नाश्ते के लिए २० मिनट का समय अलग रखें इसके लिए ठीक से योजना बनाएँ तो सुबह कुछ पहले उठ कर नाश्ते के लिए समय निकाला जा सकता है।

सुबह का नाश्ता शरीर को दिनभर ऊर्जा देते रहने में महत्वपूर्ण योगदान देता है इसलिए नाश्ते में शरीर को ऊर्जा देने वाली सभी चीजें सही मात्रा में मौजूद होनी चाहिए जैसे फाइबर युक्त ब्रेड या रोटी-पराठा, दलिया, जहाँ तक सम्भव हो शर्करा रहित कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, दूध और कुछ मात्रा में वसा।

प्रोटीन अंडे, दाल, दूध या सोयाबीन से प्राप्त हो सकता है। अंडे से प्रोटीन व वसा दोनों ही आवश्यक मात्रा में मिल जाते हैं साथ ही साथ अंडे से विटामिन `बी२' व `ए' तथा आयरन भी मिलता है। रक्त में कोलेस्ट्रोल के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ एक अंडा प्रतिदिन खाने की सलाह देते हैं।

शर्करायुक्त पदार्थ या मैदा से बने खाद्य पदार्थ लेने से रक्त में शर्करा का स्तर ऊपर की ओर बढ़ जाता है क्योंकि शरीर शर्करा को आसानी से और शीघ्र ही अवशोषित कर लेता है नतीजतन शरीर को जल्दी ही भोजन की आवश्यकता हो जाती है। सुबह के नाश्ते म़ें फल भी खाना चाहिए। फलों के जूस की बजाए पूरा फल खाना बेहतर रहता है क्योंकि फलों में मौजूद रेशे शरीर में ग्लूकोज़ का स्तर देर तक बनाए रखने में मदद करते हैं।

नाश्ते में कुछ भीगे हुए बादाम व सूखे मेवे खाना भी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। नाश्ते को लेकर हाल ही में किए गए शोध उजागर करते हैं कि जो औरतें सुबह के नाश्ते में अनाज से बनी चीजें जैसे कोर्नफ्लेक, गेहूँ फ्लेक, दलिया आदि लेतीं हैं उन्हें वजन बढ़ने जैसी परेशानियाँ नहीं होती।

खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शरीर को समय पर भोजन नहीं मिलता तो चयापचय (मेटाबोलिज्म) की दर बहुत धीमी हो जाती है और शरीर संरक्षक रूप में आजाता है। मेटाबोलिज्म की दर का धीमे होना वजन बढ़ाता है। मोटे हो जाने के डर से स्कूल जाने वाली करीब २० प्रतिशत किशोर लड़कियाँ सुबह का नाश्ता नहीं करतीं और २० में एक ऐसी भी होती हैं जो सुबह का नाश्ता और दिन का खाना दोनों ही नहीं करतीं। जबकि सर्वे दर्शाते हैं कि जो बच्चे सुबह नाश्ता करके स्कूल जाते हैं वे स्कूल में बेहतर काम कर पाते हैं।

यदि सुबह का नाश्ता आपके शरीर को अनुकूल नहीं लगता तो इस स्थिति में आप अपने नाश्ते को दो छोटे खानों में परिवर्तित कर सकते हैं। पर कभी भी नाश्ता करना मत छोड़ें। सुबह का पौष्टिक नाश्ता ही आपके शरीर को सही मायने में दिनभर खुराक देता रहता है। भूखे पेट तो ईश्वर का भजन भी नहीं हो सकता फिर भूखे पेट दिन भर काम कैसे हो सकेगा इसलिए अपने सुबह के नाश्ते को सलाम करें, उसके लिए थोड़ा समय निकालें, भरपूर खाएँ और दिनभर तरोताज़ा महसूस करें।

९ सितंबर २००६

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