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घर-परिवार बचपन की आहट


शिशु का उन्नीसवाँ सप्ताह
इला गौतम


आवाजों की दिशा का ज्ञान

शिशु को अब एहसास हो जाता है कि आवाज़ कहाँ से आ रही है और वह तुरंत उसकी तरफ़ मुड़कर देखता है। उसको व्यस्त रखने का सबसे अच्छा तरीका है चाबी के गुच्छे को हिलाना। हवा से हिलने वाली घंटी भी शिशु का ध्यान आकर्षित करने में सफ़ल रहेगी। शिशु अब अपना नाम पहचान सकता है और वह समझ सकता है कि माँ जब उसका नाम लेती है तब वह उससे बात कर रही है।

ध्यान दें शिशु कैसे माँ की तरफ़ अपना मुँह मोड़ लेता है जैसे ही माँ उसका नाम लेती है या किसी और से शिशु का नाम लेकर उसके बारे में बात करती है। ‌यदि आप शिशु को व्यस्त और मनोरंजित रखना चाहते हैं तो उससे ढ़ेर सारी बातें करें। इस उम्र में शिशु टीवी या रेडियो से भाषा नही सीखता इसलिए इन्हें बन्द कर दें और उससे असल में बातचीत करें।
 

भावनाओं का विकास

शिशु अपने भाव उतने जटिल तरीके से व्यक्त नही कर सकता जितना हम और आप कर सकते हैं। हालाकि वह साफ़-साफ़ बता सकता है कि कब उसे भूख लगी है, कब वह उदास है या खुश लेकिन उसकी प्रेम और हास्य भाव व्यक्त करने की क्षमता अभी विकसित हो रही है।

शिशु अपनी माँ के प्रति लगाव जताता है - जब माँ गोद में लेने आती है तब वह उसकी तरफ़ अपने हाथ बढ़ा देता है और जब माँ कमरे से बाहर जाती है तो रोने लगता है। हो सकता है कि वह आपको गले लगाकर प्यार भी करे।

शिशु ने धीरे-धीरे उसकी मज़ाक की समझ भी विकसित हो रही है - वह टेड़े-मेड़े चेहरे बनाने पर हँसेगा और आपको भी हँसाने की कोशिश करेगा। तरह-तरह के चेहरे बनाकर शिशु की हँसी पूरे घर में फैलने दें!

बोतल अपने हाथों में-

आप देखेंगी कि शिशु अपने दूध की बोतल अब खुद पकड़ सकता है और उसको एसा करने देने में कोई बुराई नही है, लेकिन ध्यान रखें कि शिशु को बोतल पकड़ाकर कहीं चले न जाएँ। हो सकता है कि शिशु ज़्यादा दूध पी ले या उसे ठसका लग जाए। और यदि शिशु बोतल से दूध पीते-पीते सो जाए तो दूध उसके मुँह में भर जाएगा और दाँतों पर चीनी की परत बना देगा जिससे आगे जाकर उसके दाँत सड़ सकते हैं। जमा दूध उन नलियों में भी जा सकता है जो गले के निचले भाग को कान के बीच के हिस्से से जोड़ती हैं। इससे शीशु के कान में संक्रमण हो सकता है।

खोना और पाना-

शिशु में खोने और ढूँढने की शक्ति का विकास हो रहा है। वह यह समझने लगा है कि जो चीज दिखाई नहीं देती है, उसका मतलब यह नहीं है कि वह नहीं है। उदाहरण के लिये अगर कमरे में उसकी माँ नहीं है तो उसको मालूम होता है कि जोर से रोने पर वह आ जाएगी। वह जानता है कि जो चीज दिख नहीं रही है उसे खोज कर पाया जा सकता है। उसके इस ज्ञान का विकास करने के लिये एक खेल खेला जा सकता है जो रोचक साबित होगा।

खेल खेल खेल-

  • शिशु की पसंद का टेडी बियर या कोई अन्य खिलौना लें। उसको एक बड़े लिफाफें में रखें। (ध्यान रहे कि लिफाफा प्लास्टिक का न हो।) उस लिफाफे को एक झोले में रखें, झोले पर एक छोटी चादर लपेट दें। उसको एक बकसे में रखें और उसे चादर से ढँक दें। किसी भी चीज की पाँच सतहों के भीतर खिलौना बंद किया जा सकता है। बाजार में मिलने वाले, एक के अंदर एक आने वाले गत्ते के डिब्बों का भी प्रयोग किया जा सकता है। यह सब काम शिशु के सामने करें और कहें- टेडी गया लिफाफे में, टेडी गया (जिस भी चीज में छुपाएँ) जब छुप जाए तब कहें अरे टेडी कहाँ गया... ढूँढो ढूँढो टेडी को। फिर एक एक परत खोलना शुरू करें और अंतिम परत में डिब्बें में से खिलौना निकालने के लिये शिशु को खुद झपटने दें। अगर घर में अन्य बच्चे या परिवार के सदस्य हैं तो हर किसी को एक एक परत हटाने के लिये कहें। यह खेल शिशु में इस भावना का विकास करता है कि जब चीज़ें हमारी आँखों के सामने नहीं होतीं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वे सचमुच में नहीं हैं।

याद रखें, हर बच्चा अलग होता है

सभी बच्चे अलग होते हैं और अपनी गति से बढते हैं। विकास के दिशा निर्देश केवल यह बताते हैं कि शिशु में क्या सिद्ध करने की संभावना है - यदि अभी नही तो बहुत जल्द। ध्यान रखें कि समय से पहले पैदा हुए बच्चे सभी र्कियाएँ करने में ज़्यादा वक्त लेते हैं। यदि माँ को बच्चे के स्वास्थ सम्बन्धित कोई भी प्रश्न हो तो उसे अपने स्वास्थ्य केंद्र की सहायता लेनी चाहिए।

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