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कहानियाँ

समकालीन हिन्दी कहानियों के स्तंभ में इस सप्ताह प्रस्तुत है
भारत से बृजेश कुमार शुक्ला की कहानी—"अलविदा क्रिस्टा"।


ईमेल सन्देश पढते ही संदीप खुशी से झूम उठा, उसकी इस खुशी के पीछे उसकी चैट मित्र क्रिस्टा का वह सन्देश था जिसमें उसने लिखा था कि वह अगले माह की ३१ तारीख को नयी दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचेगी। वहाँ से प्रयागराज द्वारा रेलमार्ग से इलाहाबाद आ रही है। संदीप ने सामने लगे कैलेन्डर की ओर जब नजरें घुमायीं तो उसे अहसास हुआ कि तीन दिन बाद ही क्रिस्टा आ रही है।
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पेशे से शिक्षक क्रिस्टा आस्ट्रिया के वियना शहर की रहने वाली है। संदीप से उसकी मुलाकात चैट पर आज से करीब एक साल पहले हुयी थी। रुचियों में समानता के कारण उनके दोस्ताना सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आती गयी। संदीप से पहली ही मुलाकात में क्रिस्टा ने सत्यसाईं बाबा के बारे में पूछा था।
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उसकी इस उत्कंठा के पीछे उसका मित्र पियरे था जो भारत में सत्य साईं बाबा के किसी आश्रम मे रह रहा था। किसी वजह से क्रिस्टा से उसका संपर्क टूट गया था। संदीप ने कोशिश की तो उसका पता चल गया। मित्र के बारे में अधिक बातें कभी नहीं हुयीं। क्रिस्टा एशियाई संस्कृति में शोध कर रही थी। हिन्दी की जानकारी रखती थी और अपने ज्ञान को व्यावहारिक रूप देने के लिये संदीप से नियमित संपर्क बनाए रखती थी।
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इस सबके कारण क्रिस्टा के मन में भारत भ्रमण की उत्कंठा तो थी ही, संदीप का आग्रहपूर्ण निमंत्रण पाकर वह उत्कंठा वास्तविकता का रूप लेने जा रही थी।

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