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अभी एक उनींदा-सा झोंका आँखों
में आकर ठहरा ही था कि आवाज़ आई, "कॉल फ्राम वेराइजन
वायरलेस..." फोन सविता ने उठाया। हमारा इकलौता बेटा तरुण अपनी
माँ द्वारा दिन में की गई काल के जवाब में फ़ोन पर था। मैं
वापस नींद में जाने को ही था कि बातों ने ध्यान आकर्षित कर
लिया,
"क्यों क्या पेट दर्द हो रहा है?... ठीक है मै वीकेण्ड पर आते
हुए ले आऊँगी। ...
हाँ, अच्छा ठीक है मैं कल ही ओवरनाइट करती हूँ। अहँ..अहँ
क्यों? ... इतना गड़बड़ है क्या? ... तुमने टायलोनॉल ली क्या?
अच्छा! कब से? ... ठीक है, मैं कल ही आती हूँ।"
मेरी नींद अब तक टूट गई थी। पत्नी ने बताया, ''तरुण को कई
दिनों से सर दर्द हो रहा है। लगातार टायलोनॉल की गोलियों से
काम चला रहा है।'' मैंने राहत की साँस ली। कालेज में पढ़ते
नवयुवक कब गलत संगत में पड़ जायें, पता नहीं चलता। वैसे तो
तरुण अपने पर संयम रखता है, पर जब किसी धुन में लग जाता है, तो
आगा पीछा कुछ नहीं सोचता। लगा- शायद लगातार काम करने की थकान
से स्वाभाविक सर दर्द हो गया होगा। पर नींद के प्रभाव में पुनः
आने तक मेरे आखिरी विचार यही थे कि, शायद बात कुछ गंभीर है
क्योंकि तरुण द्वारा हमारे घरेलू पाचन चूर्ण
`बुकनू`
की माँग करना काफी अस्वाभाविक था। अगली सुबह मैंने कार्यालय
में अपने साथियों को सूचित कर दिया कि तरुण की तबियत खराब है
और हम उसे देखने के लिए मैरीलेंड जा रहे हैं। |