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व्यक्तित्व

अभिव्यक्ति में गजानन माधव मुक्तिबोध की रचनाएँ

गौरव गाथा में कहानी
ब्रह्मराक्षस का शिष्य

 

 


गजानन माधव मुक्तिबोध

जन्म : १३ नवंबर १९१७

कार्यक्षेत्र-
मनुष्य की अस्मिता, आत्मसंघर्ष और प्रखर राजनीतिक चेतना से समृद्ध स्वातंत्रोत्तर प्रगतिशील काव्यधारा के शीर्ष व्यक्तित्व। मुक्तिबोध की कविता पहली बार 'तार सप्तक' के माध्यम से सामने आई, लेकिन उनका कोई स्वतंत्र काव्य संग्रह उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो पाया। कविता के साथ–साथ, कविता विषयक चिंतन और आलोचना पद्धति को विकसित और समृद्ध करने में भी मुक्तिबोध का योगदान अन्यतम है। उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जा सकता है। 'वसुधा', 'नया खून' आदि पत्रों में संपादन–सहयोग भी किया।

प्रमुख कृतियाँ :
कविता संग्रह – चाँद का मुंह टेढ़ा है, भूरी भूरी खाक धूल।
चिंतन – एक साहित्यिक की डायरी, नयी कविता का आत्मसंघर्ष, नये साहित्य का सौंदर्य शास्त्र।
आलोचना – कामायनी : एक पुनर्विचार।
इतिहास – भारत का इतिहास और संस्कृति।
कहानी संग्रह – काठ का सपना, सतह से उठता आदमी।
उपन्यास – विपात्र।
निधन : ११ सितंबर १९६४

 
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