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अभिव्यक्ति में कमलेश्वर
की रचनाएँ

गौरवगाथा में
राजा निरबंसिया
कहानियों में
क़सबे का आदमी

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कमलेश्वर
जन्म :
6 जनवरी को उ.प्र. के मैनपुरी जिले में भारत में।
शिक्षा :
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की उपाधि।
कार्यक्षेत्र :
'विहान' जैसी पत्रिका का 1954 में संपादन आरंभ कर कमलेश्वर
ने कई पत्रिकाओं का सफल संपादन किया जिनमें 'नई
कहानियाँ'(1963-66), 'सारिका' (1967-78), 'कथायात्रा'
(1978-79), 'गंगा' (1984-88) आदि प्रमुख हैं। इनके द्वारा
संपादित अन्य पत्रिकाएँ हैं- 'इंगित' (1961-63) 'श्रीवर्षा'
(1979-80)। हिंदी दैनिक 'दैनिक जागरण'(1990-92) के भी वे
संपादक रहे हैं। 'दैनिक भास्कर' से 1997 से वे लगातार जुड़े
हैं। इस बीच जैन टीवी के समाचार प्रभाग का कार्य भार
सम्हाला। सन 1980-82 तक कमलेश्वर दूरदर्शन के अतिरिक्त
महानिदेशक भी रहे।
कमलेश्वर का नाम नई कहानी
आंदोलन से जुड़े अगुआ कथाकारों में आता है। उनकी पहली कहानी
1948 में प्रकाशित हो चुकी थी परंतु 'राजा निरबंसिया' (1957)
से वे रातों-रात एक बड़े कथाकार बन गए। कमलेश्वर ने तीन सौ
से ऊपर कहानियाँ लिखी हैं। उनकी कहानियों में 'मांस का
दरिया,' 'नीली झील', 'तलाश', 'बयान', 'नागमणि', 'अपना
एकांत', 'आसक्ति', 'ज़िंदा मुर्दे', 'जॉर्ज पंचम की नाक',
'मुर्दों की दुनिया', 'क़सबे
का आदमी' एवं 'स्मारक' आदि
उल्लेखनीय हैं।
उन्होंने दर्जन भर उपन्यास
भी लिखे हैं। इनमें 'एक सड़क सत्तावन गलियाँ', 'डाक बंगला',
'तीसरा आदमी', 'समुद्र में खोया आदमी' और 'काली आँधी' प्रमुख
हैं। 'काली आँधी' पर गुलज़ार द्वारा निर्मित' आँधी' नाम से
बनी फ़िल्म ने अनेक पुरस्कार जीते। उनके अन्य उपन्यास हैं
-'लौटे हुए मुसाफ़िर', 'वही बात', 'आगामी अतीत', 'सुबह-दोपहर
शाम', 'रेगिस्तान', 'एक और चंद्रकांता' तथा 'कितने
पाकिस्तान' हैं। 'कितने पाकिस्तान' ऐतिहासिक उथल-पुथल की
विचारोत्तेजक महा गाथा है।
कमलेश्वर ने नाटक भी लिखे
हैं। 'अधूरी आवाज़', 'रेत पर लिखे नाम' , 'हिंदोस्ताँ हमारा'
के अतिरिक्त बाल नाटकों के चार संग्रह भी उन्होंने लिखे हैं।
आलोचना के क्षेत्र में उनकी
'नई कहानी की भूमिका' तथा 'मेरा पन्ना: समानांतर सोच'(दो
खंड) महत्वपूर्ण पुस्तकें समझी जाती है। उनके यात्रा विवरण
'खंडित यात्राएँ' और 'कश्मीर: रात के बाद' तथा के संस्मरण
'जो मैंने जिया', 'यादों के चिराग़' तथा 'जलती हुई नदी'
(1997) शीर्षक से प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने 'संकेत', 'नई
धारा', 'मेरा हमदम मेरा दोस्त' इत्यादि हिंदी, मराठी, तेलगु,
पंजाबी एवं उर्दू कथा संकलनों का भी संपादन किया है।
फ़िल्म और टेलीविजन के लिए
लेखन के क्षेत्र में भी कमलेश्वर को काफ़ी सफलता मिली है।
उन्होंने सारा आकाश, आँधी, अमानुष और मौसम जैसी फ़िल्मों के
अलावा 'मि. नटवरलाल', 'द बर्निंग ट्रेन', 'राम बलराम' जैसी
फ़िल्मों सहित 99 हिंदी फ़िल्मों का लेखन किया है।
कमलेश्वर भारतीय दूरदर्शन
के पहले स्क्रिप्ट लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं।
उन्होंने टेलीविजन के लिए कई सफल धारावाहिक लिखे हैं जिनमें
'चंद्रकांता', 'युग', 'बेताल पचीसी', 'आकाश गंगा', 'रेत पर
लिखे नाम' आदि प्रमुख हैं। भारतीय कथाओं पर आधारित पहला
साहित्यिक सीरियल 'दर्पण' भी उन्होंने ही लिखा। दूरदर्शन पर
साहित्यिक कार्यक्रम 'पत्रिका' की शुरुआत इन्हीं के द्वारा
हुई तथा पहली टेलीफ़िल्म 'पंद्रह अगस्त' के निर्माण का श्रेय
भी इन्हीं को जाता है। तकरीबन सात वर्षों तक दूरदर्शन पर
चलने वाले 'परिक्रमा' में सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याओं पर
खुली बहस चलाने की दिशा में साहसिक पहल भी कमलेश्वर जी की
थी। वे स्वातंत्र्योत्तर भारत के सर्वाधिक क्रियाशील,
विविधतापूर्ण और मेधावी हिंदी लेखक हैं।
निधन:
27 जनवरी 2007 |