व्यक्तित्व


अभिव्यक्ति में कृष्णा सोबती की रचनाएँ

कहानी
दादी अम्मा

संस्मरण
फोन बजता रहा

 

 

कृष्णा सोबती

जन्म : १८ फरवरी १९२५ को गुजरात (अब पाकिस्तान) में।
शिक्षा - दिल्ली, शिमला और लाहौर में

कार्यक्षेत्र-
कृष्णा सोबती अपनी संयमित अभिव्यक्ति और सुथरी रचनात्मकता के लिए जानी जाती हैं उन्होंने हिंदी की कथा भाषा को विलक्षण ताज़ग़ी दी है उनके भाषा संस्कार के घनत्व, जीवंत प्रांजलता और संप्रेषण ने हमारे वक्त के कई पेचीदा सत्य उजागर किए हैं

प्रकाशित कृतियाँ-
उपन्यास- सूरजमुखी अँधेरे के, दिलोदानिश, ज़िन्दगी नामा, ऐ लड़की, समय सरगम, मित्रो मरजानी, जैनी मेहरबान सिंह।
कहानी संग्रह- बादलों के घेरे, डार से विछुरी।
संस्मरण- हमदशमत
यात्रा विवरण- यारों के यार तिन पहाड़
रचनात्मक निबंध- शब्दों के आलोक में

पुरस्कार व सम्मान-
साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता समेत कृष्णा सोबती को साहित्य अकादमी, साहित्य शोरोमणि, मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार के साथ साथ हिंदी अकादमी दिल्ली की ओर से वर्ष २०००-२००१ का शलाका सम्मान तथा पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला तथा साहित्य अकादेमी की विशिष्ट फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया है।