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सर्दी का सूरज 

-पूर्णिमा वर्मन
१ अक्तूबर २००१

  सुबह सुबह आ जाता सूरज
दंगा नहीं मचाता सूरज
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ना आँधी ना धूल पसीना
सरदी में मनभाता सूरज
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छतरी लगा बाग में बैठो
पिकनिक रोज़ मनाता सूरज
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बर्गर हो या पिज़ा पेस्ट्री
सबके मज़े बढ़ाता सूरज
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नरम दूब पर छाया रहता
यहाँ वहाँ इतराता सूरज
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दिन भर मेरे साथ खेलता
शाम ढले घर जाता सूरज
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