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कितनी सुंदर है वह? बात
करने का मौका मिल जाए तो मज़ा आ जाए। नरेश घिया ने अपने आप
से कहा। और बात करने के इरादे से उसने अपनी ओर बढ़ती हुई
लड़की की तरफ़ मुसकरा-कर देखा।
उसके चेहरे पर भी
मुस्कुराहट थी। वह कह रही थी,''मैं आपके पास आ ही रही थी।''
''सचमुच, मुझे बहुत खुशी हुई मिस''
''नंदिता मेहता'' उसने वाक्य पूरा किया।
''कल की गोष्ठी में मुझे आप
का व्याख्यान बहुत पसंद आया,'' फिर अचानक वह आत्मविभोर हो कर
बोली --''मुझे इतना पसंद आया कि मैंने सोचा अगर मैं खुद आकर
आपका अभिनंदन नहीं करती हूँ, तो अपनी नज़रों में ही गिर
जाऊँगी।''
नरेश ज़रा झुककर बोला,''थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू, मिस।''
''नंदिता, नंदिता मेहता नहीं मिस्टर घिया।''
''पर आपने गलती की न, मिस नंदिता।''
''मैंने गलती की? कौन-सी?
''मेरा नाम मिस्टर घिया नहीं, नरेश है।''
''ओह, सॉरी, हाँ मैं अपनी खुशी ही आपके सामने व्यक्त करना
चाहती थी।''
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