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साहित्य संगम  

साहित्य संगम के इस अंक में प्रस्तुत है डॉ. लक्ष्मीनंदन बोरा की असमिया कहानी का हिंदी रूपांतर नौकरी की आवश्यकता। रूपांतरकार हैं- राजीव कुमार।


क़िताब का नाम मेघनाद साहा है। अंग्रेज़ी किताब है, प्रसिद्ध पदार्थवैज्ञानिक की। जीवनी का असमिया अनुवाद कर इस महीने में दिल्ली भेजना है, नई दिल्ली के नेशनल बुक ट्रस्ट को। इसके निदेशक दो बार तकाज़ा भी कर चुके हैं पर इसी महीने में काम समाप्त कर पाऊँगा या नहीं बता नहीं सकता। पांडुलिपि जमा करने की तारीख बीते भी दो महीने हो चुके हैं।

मैंने काम नहीं लेने का ही सोचा था। लेकिन इस वैज्ञानिक के प्रति मेरा अपार लगाव है। किताब का अनुवाद करने की ज़िम्मेवारी लेकर अच्छा कार्य ही किया है ऐसा लगता है। इनको मैंने कलकत्ते में दो बार देखा। तब वह आणविक आयोग के अध्यक्ष थे। एक बार उनके कुछ प्रिय छात्रों ने उनसे इस तरह पूछा, ''सर आप एक बड़े वैज्ञानिक हैं लेकिन कुछ वर्षों से राजनीति क्यों कर रहे हैं?'' सवाल सुनकर वह बहुत गंभीर हो गए। छात्रों को लगा वह सवाल का जवाब नहीं देंगे।
उन लोगों ने सोचा कि वे सवाल से असंतुष्ट हुए हैं। पर वह कुछ देर तक चुपचाप रहने के बाद धीरे-धीरे कहने लगे, ''देश के सभी नागरिकों को समान सुविधाएँ मिलनी चाहिए। यह ही राजनीति का उद्देश्य होना चाहिए। देखो मैं किसी कारणवश इस तरह का व्यक्ति बन गया। सुविधा के अभाव में मुझसे अधिक गुणी लड़का खतम हो जाएगा या हो गया है उसकी खबर क्या हम रखते है? मेरे जीवन के पहले भाग में जो अवर्णनीय दुख हुआ वह इस वक्त सोचने पर डर लगता है।

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