प्रौद्योगिकी

चेन मेल की चेन खींच दें

--रमण कौल

चेन मेल का इतिहास
चेन मेल की बीमारी सदियों से चली आ रही है। चेन मेल यानी डाक या ईमेल से प्राप्त हुआ ऐसा पत्र जिस में डरा-धमका कर या बहला-फुसला कर आपसे यह कहा गया हो कि इस पत्र को आगे कई लोगों को भेजें। चेन मेल के इतिहास को देखा जाए तो 'ईश्वर' द्वारा लिखा गया एक पत्र १७९५ ईस्वी से यूरोप और अन्य महाद्वीपों के चक्कर काट रहा है। पिछली शताब्दी में लोगों ने और नए-नए तरीके सोचे दूसरों को मूर्ख बनाने के। हज़ारों चिट्ठियाँ शुरू की गईं जिन में लोगों की भक्ति-भावना, धन-लोलुपता, दान-पुण्य की भावना आदि का वास्ता दे कर हज़ारों की करोड़ों चिट्ठियाँ बनाने का प्रयत्न किया गया और इन प्रयत्नों में लोगों को सफलता भी मिली। पर दुनिया को मूर्ख बनाने की संतुष्टि के अतिरिक्त मिला क्या यह कहना मुश्किल है। डेनियल वानार्सडेल ने चेन डाक पर अपने शोध पर आधारित विस्तृत जानकारी विश्वजाल पर प्रकाशित की है, उसे अवश्य पढ़ें।

चेन मेल से हम-आप का अनुभव
यदि आप का कोई डाक का पता है या ईमेल पता है या दोनों हैं तो ज़रूर आप का वास्ता चेन-डाक से पड़ा होगा। मैं बचपन से ही चेन-मेल देखता आया हूँ और हमेशा से ही इस से नफ़रत करता आया हूँ। मुझे याद है जब पोस्ट-कार्ड या "अंतर्देशीय पत्र" आया करते थे, कुछ इस तरह के "फलाँ जगह पर फलाँ व्यक्ति को सपने में संतोषी माँ के दर्शन हुए और माँ ने उसे कहा कि यह संदेश ११ व्यक्तियों तक पहुँचाओगे तो छुपा हुआ धन पाओगे। उसने माँ की आज्ञा का पालन किया और उसे धन मिला। आप भी यह पत्र ११ व्यक्तियों को भेजिए। फलाँ व्यक्ति ने इस पत्र को बेकार जान कर फेंक दिया तो उसे बहुत नुकसान उठाना पड़ा वगै़रा-वगै़रा।" अक्सर लोग इसे गंभीरता से लेते थे और लगे रहते थे इन चिटि्ठयों की कापियाँ बनाने में, हाथ से, फोटोकापी से यहाँ तक कि टाइपिंग या साइक्लोस्टाइल से। मैं हमेशा ऐसी चिटि्ठयों को कू़ड़ेदान के हवाले करता आया हूँ।

आजकल चेन-मेल का नया अवतार है चेन-ईमेल के रूप में। कंप्यूटर और इंटरनेट ने जैसे सब के काम आसान किए हैं वैसे ही चेन-मेल भेजने वालों के भी। आप यदि कोई बिल गेटस की दौलत के हिस्सेदार बनने का अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहते या किसी देवी के प्रकोप का शिकार नहीं होना चाहते तो बस फॉरवर्ड पर क्लिक कीजिए, अपने चहेते दोस्तों के ईमेल पते भरिए और 'सेंड' पर क्लिक कीजिए। बस इंतज़ार कीजिए सौभाग्य और धन संपत्ति का।

आए दिन हम सब के पास ईमेल में फॉरवर्ड किए हुए मेल आते हैं और साथ में यह लिखा होता है कि इसे आगे फॉरवर्ड करें। कोई बीमार व्यक्ति की सहायता के लिए होता है, किसी में किसी मनगढ़ंत वाइरस की चेतावनी होती है तो किसी में लिखा होता है कि बिल गेटस यह मेल फॉरवर्ड करने वालों को पैसे बाँट रहा है।

लोग चेन मेल आगे क्यों फारवर्ड करते हैं यह तो समझ आता है - वे भेजने वाले पर यकीन करते हैं और सोचते हैं शायद माइक्रोसॉफ्ट वाले वास्तव में पैसे बाँट रहे हों, कोशिश करने में क्या हर्ज़ है? मेहनत भी तो नहीं है। पर प्रश्न यह है कि लोग इस तरह ही चेन मेल शुरू क्यों करते हैं। उन्हें क्या लाभ होता है?

चेन मेल आने पर क्या करें
कोई लतीफ़ा आपको अच्छा लगा, आप ने आगे अपने दोस्तों को अपनी इच्छा से भेज दिया, वह तो बात बनती है पर इसके अतिरिक्त अगली बार कोई आप को मेल फॉरवर्ड करने के लिए कहे तो रुकें। पहले जाँच लें कि ईमेल में दी गई सूचना गल़त तो नहीं है। अक्सर गूगल या अन्य किसी खोज इंजन पर खोजने से पता चल जाता है। नहीं तो कुछ साइटें इसी काम के लिए बनीं हैं, उदाहरणत: ब्रेक द चेन, होक्सबस्टर्स आदि। यदि आप समझ जाते हैं कि ईमेल फॉरवर्ड करने योग्य नहीं है जिसकी बहुत अधिक संभावना है तो आप ईमेल भेजने वाले को वापस एक 'ऍण्टी-चेन-मेल' भेजें

चेन मेल के कुछ हाल के उदाहरण
हाल में मुझे किसी मित्र ने वही पुराना ईमेल भेजा - कि बिल गेटस अपनी दौलत लुटा रहा है और हर ईमेल फॉरवर्ड करने वाले को २४८ डॉलर मिलेंगे और जब आप का ईमेल जब आगे फॉरवर्ड होगा तो हर ईमेल पर आप को २४३ डॉलर मिलेंगे। अब यह मेल तो पहले भी कई बार आ चुका था और इस पर यकीन करने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता था, पर इस बार हैरानी यह थी कि लगभग हर फॉरवर्ड करने वाले ने इस झूठ के ऊपर अपनी मुहर लगाई थी, "हाँ, मेरे एच.डी.एफ.सी. बैंक में आज १५,००० डॉलर आ गए।" "मुझे आज आई.सी.आई.सी.आई. बैंक में १२,५४५ डॉलर मिले" आदि। साथ में भेजने वाले का नाम, पता, फ़ोन नंबर। अक्सर लोग गेल, टीसीएस, इंडियन ऑइल आदि में काम कर रहे हैं और अपने दफ्तर का ईमेल और ईमेल सूचियाँ प्रयोग कर रहे हैं। सभी लोग पढ़े-लिखे इंजीनियर, वैज्ञानिक सरीखे लोग। यह समझने में कितना दिमाग़ लगता है कि इस तरह की स्कीम का सही होना अंकगणितीय रूप से असंभव है? क्या यह झूठ इसलिए लिख रहे हैं ताकि अगला आलस्य न करे?

कुछ और झूठे किस्से जो इंटरनेट पर कई-कई बार घूम चुके हैं और हाल में ही मेरे ईमेल में आए हैं -

१. सीमेन्ज की दिव्या सिंह का अपने पति के लंग कैन्सर के लिए मदद माँगता चेन-मेल और उसका तोड़।
२. एक बच्चे की पुकार जिस की माँ ९-११ की शिकार बनी और उसका तोड़।
. आई.आई.टी. चेन्नई के तथाकथित डीन विजय क्रांति का देशभक्तिपूर्ण पत्र और उसका तोड़।

३ बिल गेटस की दौलत के बारे में बिल गेटस से ही सुन लीजिए। बिल कहते हैं, "यह सब (कि माइक्रोसॉफ्ट ईमेल फॉरवर्ड करने वालों को पैसा देगा) बकवास है। पर इंटरनेट पर बहुत कुछ बकवास भी है और बहुत कुछ बदतमीज़ी भी। पर इसका अर्थ यह नहीं कि इंटरनेट एक अद्भुत चीज़ नहीं है या इससे दुनिया बदल नहीं जाएगी, या समय के साथ इस में ढ़ेर-सा सुधार नहीं होगा।"

चेन मेलों के बारे में काफ़ी सूचना यहाँ भी दी गई हैं। आइए मिल कर चेन मेल की जज़ीरें तोड़ें। प्रण करें कि आगे से कोई ईमेल बिना जाँचे लोगों को फॉरवर्ड न करें।

२४ जनवरी २००६