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हास्य व्यंग्य

 

हास्य व्यंग्य

मनीप्लांट
—सुधीर ओखदे


त्नी की इच्छा थी कि घर में मनी प्लांट लगाया जाए। इच्छाएं तो उसकी अनंत थीं¸ जैसे बंगला बनवाया जाए¸ कार खरीदी जाए¸ कुत्ता रखा जाए¸ बच्चों को पब्लिक स्कूल में भर्ती कराया जाए¸ अपने बाल कटाए जाएं¸ पति के बाल बढ़वाएं जाएं। लेकिन जानती थी कि ये सभी बातें असंभव हैं। उसका पति न मंत्री है¸ न संत्री। न ही प्रवचन देने वाला धर्म गुरू। फिर भला उसकी इतनी इच्छाएं क्यों कर पूरी होंगी!

उसने एक कुत्ता रखा था। देसी नस्ल का। जो किसी को रास नहीं आया। उसे भी नहीं। चाहती थी कि विदेशी नस्ल का कुत्ता रखे। पर कुत्ते की कीमत पति की महीने भर की पगार से भी ज्यादा होने से उसने पति रखना ही उत्तम समझा। देसी कुत्ता कहीं भी मुंह मारता था। घर छोड़ कर भाग जाता था। बाद में खुद ही पूंछ हिलाता वापस आ जाता था। पत्नी ने कहा बिलकुल तुम पर गया है। एक ही स्वभाव के दो लोगों को घर में नहीं रख सकती।

किसी ने पत्नी को बताया कि मनी प्लांट मांग कर या खरीद कर नहीं¸ चुरा कर लगाया जाए¸ तो फलता–फूलता है। मैंने सोचा पैसा भी चोरी से ही फलता–फूलता है। पत्नी ने आदेश दिया कि मनी प्लांट कहीं से भी चुरा लाओ। मैंने कहा¸ भागवान! यही आदत होती तो तुम्हारी अनंत इच्छाएं पूरी नहीं कर देता। बंगला होता¸ कार होती¸ कुत्ता होता¸ तो मनी प्लांट भी आपने आप होता।

पत्नी बोली¸ मैं जानती थी कि तुम कहीं न कहीं रोड़ा जरूर अटकाओगे। अब चोरी करने भी क्या मैं जाऊँ? लाज–शरम तो जैसे बेच खाई है तुमने। संस्कार भी कोई चीज होती है। कहीं भले घर की औरतें चोरी करती हैं?

मैंने मन ही मन सोचा¸ ठीक कहा तुमने। औरतें खुद कहां कुछ करती हैं। ऐसे काम करवाने के लिए उनके पास पति नाम का बेवकूफ होता है न! रामायण¸ महाभारत से लेकर स्वतंत्र भारत तक औरतों ने कहां कुछ किया है!

मनी प्लांट तुम ही चुराओगे। बस! आगे मैं कुछ नहीं जानती। उस समय वह मुझे कैकयी¸ मंथरा और द्रौपदी की तरह दिखाई दी। कोपभवन में उसने अपने केश बिखरा दिए थे¸ जो मेरे मनी प्लांट चुराने के उपरांत ही पुन: सजने वाले थे।

मैंने रामखिलावन से पूछा¸ तुम्हें चोरी का कोई तजुर्बा है? यदि हो तो बताओ?

रामखिलावन एक पुजारी के पड़ोस में रहता था। सो उसने इनकार नहीं किया। उसने कहा चोरी वह होती है¸ जो पकड़ी जाए। तुम कैसी चोरी करना चाहते हो? बिजली की चोरी¸ सरकारी फोन से कॉल की चोरी¸  कर की चोरी¸  ऑफिस स्टेशनरी की चोरी¸  सरकारी वाहन के दुरूपयोग की चोरी या पैसे की चोरी?  पैसे की सीधी चोरी को छोड़ दिया जाए¸  तो बाकी की चोरियां¸  चोरी की श्रेणी में नहीं आतीं।

तुम्हारे घर के सामने कार्यालय का वाहन खड़ा रहे। तुम्हारे बीबी–बच्चों को निजी कामों के लिए सरकारी वाहन की सवारी प्राप्त हो¸ तो समाज में तुम्हारी प्रतिष्ठा बढ़ती है। तुम कैसी चोरी करना चाहते हो?

मैंने बताया कि मैं मनी प्लांट चुराना चाहता हूं। उसने कहा¸ चुरा लो। कौन रोकता है तुम्हें।

मैं किसी मनी प्लांट चुराऊं तो कोई मुझे कुछ नहीं कहेगा?

व्यापारी अपने उत्पादन विज्ञापन का पैसा तुम से चुराता है तुम कुछ कहते हो उसे?  नेता जातिवाद फैलाकर तुम्हारा वोट चुराता है¸ तब तुम कुछ कहते हो उसे?  डॉक्टर ग्राहक संरक्षण नियम का हवाला दे कर जब तब तुम्हारा खून चूसता है तुम कुछ कहते हो उसे?

मुझे मौन देखकर रामखिलावन ने योजना बताई¸ पड़ोस के चार–पांच घरों के बाद पाठक जी का बंगला था। जहां मनी प्लांट नेताओं की तरह यत्र–तत्र सर्वत्र बिखरा था। तय हुआ कि मैं और रामखिलावन रात के अंधेरे में बंगले को जाएंगे। रामखिलावन पहरा देगा और मैं गेट की ओर लटक रहे मनीप्लांट की एक डाल चुपके से काट लूंगा।

मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि अब बैठा या तब बैठा। रामखिलावन मुझे तसल्ली दे रहा था। रात के अंधेरे में हमने बड़ी सरलता से अपने काम को अंजाम दिया। मनी प्लांट की डाल पकड़े मैं किसी घोटाले से निर्दोष छूटे मंत्री की भांति तन गया था। कहाँ कुछ हुआ?  हाथ बढ़ाया और डाल हाथ में। मनी प्लांट मैंने पत्नी के हाथ में दिया¸ तो वह प्यार से मुस्कुराई। उसने मनी प्लांट को एक बड़ी बोतल में पानी डाल कर लगा दिया।

पत्नी मनी प्लांट को रोज प्यार से निहारती थी। एक दिन वह मुझसे बोली¸ सुनो जी! मुझे लगता है मनी प्लांट मुरझा रहा है।

मैंने पत्नी को मनी प्लांट घर के बाहर धूप में रखने की सलाह दी तो वह बोली¸ तुम भी निरे . . . . हो। कहीं मनी प्लांट धूप में रखा जाता है। मनी प्लांट तो मध्यम वर्गीय पत्नी की तरह होता है¸ जिसे ड्राइंग रूम में ही सजाया जा सकता है।

मैंने उसे बताया कि जो मनी प्लांट मैं तुम्हारे लिए चुरा कर लाया हूं बंगले के बाहर ही लटक रहा था। हाथ बढ़ाया और डाल तोड़ ली। तुम इसे बाहर रखो। यह निश्चित बहार लाएगा।

पत्नी ने मनी प्लांट उस दिन बाहर रखा और वह चोरी हो गया। पड़ोसी ने बताया कि वह चोर को जानता है। उसने खुद पास के बंगलेवाले पाठक जी को मनी प्लांट चुराते देखा है। पड़ोसी ने यह भी बताया कि ये जो उनके घर में इतना मनी प्लांट भारतवर्ष में भ्रष्टाचार की तरह चारों तरफ बिखरा दिख रहा है¸ वह दूसरों के घरों का चुराया हुआ ही मनी प्लांट है। आम आदमी का शोषण कर तिजोरी बढ़ रही है¸ मनी प्लांट बढ़ रहा है¸ अत्याचार बढ़ रहा है¸ दान–धर्म बढ़ रहा है।

मैंने पत्नी की तरफ निराशा से देखा¸ तो पड़ोसी बोला¸ पहले काले पैसे की डाल तोड़ना सीखो तभी यह पेड़ बढ़ेगा।

मेरी पत्नी से पूछा अब पेड़ कहां है। वह तो चोरी हो गया है।

पत्नी मुसकराई। मैं समझ गया ये मनी प्लांट मेरा चरित्र¸ ईमान¸ स्वाभिमान सब चुरा ले गया है।
 

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