हास्य व्यंग्य

क्रोध करिए काम पर चलिए
—अविनाश वाचस्पति


क्रोध न करना अब घाटे का सौदा होने वाला है। क्रोध करूँगा तो इससे मुझे निर्णय लेने में आसानी होगी। बस एक अलग तरह की अनूठी सोच होनी चाहिए। क्रोध गुणकारी औषधि साबित हो गया है।

नई रिसर्च कहती है कि अगर आप शांत स्वभाव के हैं, किसी से तेज़ आवाज़ में बोल भी नहीं सकते, किसी को डांट डपट नहीं सकते, बीवी पर या मियाँ पर क्रोध नहीं कर सकते, तो यह स्थिति निस्संदेह चिंता का विषय है। आपको क्रोध आना चाहिए। आपको तो अपने बॉस पर भी क्रोध करने का हक मिलने वाला है - तो जो लोग आपको क्रोध दिला सकें तो वो आपके हितैषी हुए बनिस्बत उनके जो आपको सदैव शांत रहने, क्रोध न करने की सलाह देते रहते हैं।

सौदे में घाटा न हो इसके लिए सभी प्रयत्नशील रहते हैं। अब चाहे वो नंबर एक का हो या दो का अथवा तीन का। सफलता की बीन तो हर सौदे में बजनी ही चाहिए। आप सड़क पर यातायात में फँसे हों अथवा पुलिस स्टेशन में। आपको गुस्सा नहीं आया तो आपको नुकसान हो सकता है। अब आपका क्रोध ही आपके लिए सफलता के नए-नए द्वार खोलेगा। वो लोग जो कोई फैसला नहीं ले पाते हैं। ऊहापोह या असमंजस में फँसे रहते हैं। क्रोध उनके लिए बहुत लाभकारी है। नए अध्ययन यही बतला रहे हैं।

ख़बरें आ रही हैं कि शोधकर्ताओं ने क्रोध से होने वाले फ़ायदों का गुणगान करना शुरू कर दिया है। भला यह भी कोई बात हुई कि किसी का अगर कद छोटा है, कोई कम पढ़ा है, किसी का दिमाग ढंग से काम नहीं करता, कोई परीक्षा में फेल हो गया है, परीक्षा देते समय नकल करते हुए पकड़ा गया है, खुदकुशी करने में सफलता मिली है तो भी और असफल हुआ है तो भी। चुनाव लड़ने पर जीत गया या हार गया। हारने पर हार पहनने को मिल गया तो वो भी जीत है। शोधकर्ता शोध कर करके हर चीज़ में फ़ायदे तलाश ही लेंगे। क्रोध न करने के फ़ायदे तो सभी को मालूम हैं पर अब क्रोध करने के फ़ायदे भी जगजाहिर हो गए हैं।

भगवान जो करता है अच्छा करता है। भगवान है न? एक राजा की उँगली कट गई तो वजीर ने कहा कि अच्छा हुआ। राजा ने वजीर को जेल भिजवा दिया। वजीर ने फिर कहा कि अच्छा हुआ। कुछ दिनों बाद शिकार के दौरान जंगल में राजा रास्ता भूल गया और उत्सव मनाते आदिवासियों के हाथ पड़ गया। वे देवता को प्रसन्न करने के लिए राजा की बलि चढ़ाने लगे। बलि से पहले राजा की शारीरिक जाँच हुई और पाया गया कि राजा का अंग भंग है। वही उँगली जो कट गई थी, राजा के जीने की वजह बनी।

राजा ने आकर वजीर को छोड़ दिया। फिर पूछा मेरी उँगली कटी वो तो अच्छा हुआ, उसी की वजह से मेरी जान बची पर तुम्हारा जेल जाना कैसे अच्छा हुआ? आश्चर्य इतनी साधारण-सी बात राजा नहीं सोच पाते थे, आखिर राजा थे। राजा का काम सोचने का नहीं, पूछने का, जानने का होता था। समझने समझाने का काम वजीर का। वजीर ने समझाया मुझे जेल न होती तो मेरी बलि दी जाती। तुम्हारी बलि? राजा ने नहीं समझना था, नहीं समझा। राजा जो था। मैं आपके साथ होता, उँगली आपकी कटी थी, मेरी नहीं। इसलिए बलि मेरी दी जाती। राजा खुश हो गया। पता नहीं समझ पाया या नहीं, पर खुश हो गया।

आज मुझे क्रोध आ रहा है कि मुए शोधकर्ता इन विषयों पर रिसर्च क्यों नहीं करते और अपने शोध में शराब, सिगरेट, गुटखे, तंबाकू, गर्द, हेरोईन इत्यादि नशों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हितकारक क्यों नहीं बतलाते? इसके सेवन से आत्म विश्वास में वृद्धि होती है। क्रोध में वृद्धि होती है। तंबाकू गुटखे का सेवन भी ऐवन है। इससे बेचने वाले को लाभ होता है। ख़ैर... मेरी मानते हुए जर्मनी के शोधकर्ताओं ने शराब को भी गुणकारी बतला ही दिया है।

कैंसर, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, एड्स इत्यादि बीमारियों से भी समाज को लाभ हो रहे हैं - इसके कारण कितने ही रोज़गार मिल रहे हैं, दवाइयों की बिक्री हो रही है, कितने ही कवि और लेखक इन विषयों पर लिख छपकर लाभान्वित हो रहे हैं और अख़बारों को भी लाभ पहुँचा रहे हैं। सनसनीखेज घटनाओं से रिश्वतख़ोरों, भ्रष्टाचारियों और नेताओं की करतूतों से चैनलों की टी.आर.पी बढ़ रही है। इंटरनेट की साइटें ऐसी जानकारियों से लबालब भरी हुई हैं। बस खंगालने वाले कम पड़ रहे हैं? आखिर लाभ तो हो ही रहा है। कहाँ तक गिनाऊँ? मेरी मानिए तो क्रोध करिए और काम पर चलिए।

७ जनवरी २००८