हास्य व्यंग्य

ओबामा ने मारी मक्खी
अविनाश वाचस्पति


सी.एन.बी.सी. के साथ साक्षात्कार में अमेरिकी प्रेजीडेंट ने मक्खी मारकर दुनिया भर को चर्चा का एक विषय दे दिया है। ज्यादातर लोगों का विचार है कि इस हालिया कारनामे को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में स्थान दिया जाना चाहिए जबकि बुक वाले इस ओर से बेरूखी दिखला रहे हैं। दूसरी ओर मक्खियों का एक प्रतिनिधिमंडल अपने समुदाय के एक प्राणी की अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथों मारे जाने वाले मसले पर शांत होता नहीं दिखलाई दे रहा है। यहाँ भी राष्ट्रपति की ही चल रही है। वे नहीं चाहते कि दुनिया उन्हें मक्खीमार का खिताब दे।

मक्खी बिलकुल शांतिप्रिय होती है। क्या हुआ अगर वो गुन गुन की धुन बजा बजाकर सबको सतर्क करती है। वो गंदगी को भी उसी धुन से बुकमार्क करती है जिस धुन से मिठाई को। मक्खी का मँडराना चीजों की बुकमार्किंग यानी चिह्नित करना ही है। इसी प्रकार एक मक्खी ने अमेरिकी प्रेजीडेंट को चिह्नित कर कातिल बना दिया है। सर्वशक्तिमान ओबामा ने एक निरीह मक्खी की हत्या कर रिकार्ड बनाया है। वे कितने शक्तिशाली हैं आप इसे जान सकते हैं। एक मक्खी भी उनसे बच नहीं सकती। जबकि मक्खी पर मक्खी मारना न तो उनका शगल है और न सदा मक्खियाँ ही उनकी बगल में रहती हैं। वह तो यह बगलगीर होने वाली मक्खी ज्यादा दिमागदार निकली और ओबामा तक पहुँच गई। मक्खियाँ मारना वैसे तो खाली समय को बिताने के तौर पर सदा से व्यंजित होता रहा है परन्तु अमेरिकी राष्ट्र पति ओबामा ने टी वी इंटरव्यू देते समय एक मक्खी मारकर इस मिथक को भी मक्खी के साथ ही धराशायी कर दिया है।

मजे की बात तो यह है कि इस पूरी घटना, दुर्घटना या हादसा, आप जो भी मानना चाहें, की पूरी रिकार्डिंग हुई है और यह भी हो सकता है कि इस वीडियो रिकार्डिंग की बोली लगे और नीलामी में इस रिकार्डिंग को ऊँची धनराशि देकर खरीद लिया जाए और उस धन को मक्खियों के विकास पर खर्च किया जाए। अगर ऐसा हुआ तो एक मक्खी की बलि करोड़ों अरबों मक्खियों के उत्थान का सबब बनेगी। पर इंसान अपने सिवाय किसी का विकास नहीं चाहता है इसलिए उस पैसे का दुरुपयोग ही किया जाएगा। यही इंसान की फितरत है। अपने विकास के लिए वो जानवरों, पर्यावरण सबका बेहूदा इस्तेमाल तक करता आया है और करता रहेगा।

वैसे जिस मक्खी को मारा गया है उसके बारे में मशहूर है कि वो कुत्ते पर सवारी करती थी। अब पता नहीं उसका वाहन कहाँ है। पता तो यह भी चला है कि रिकार्डिंग केन्द्र तक तो यह मक्खी कुत्ते पर सवार होकर ही आई थी परन्तु कुत्ते ने सुरक्षाकर्मियों को भ्रमित किया और वे उससे उलझ गए। इसी बीच मक्खी ने अवसर का लाभ उठाया और सर्र सर्र करती धीमे से सुरक्षा अधिकारी के पीछे से निकली, कुछ आगे बढ़ी और पीछे लौट पड़ी। उसे लौटते देख सुरक्षा अधिकारी अधिक सतर्क हुए और उन्होंने मक्खी को सुरक्षा कारणों से बाहर जाने से रोका कि कहीं वो सीक्रेट्स आउट न कर दे और उसे अंदर ही रोक दिया गया। जबकि असलियत में वो अंदर ही जाना चाह रही थी, बल्कि अंदर जाने में शत प्रतिशत सफल हो चुकी थी।

सुरक्षा इंतजामों की इस प्रकार की लापरवाहियों को दूर करने के लिए उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस बाबत एक अध्याय जोड़ा जाना चाहिए जिसका श्रेय ओबामा मारित मक्खी को खुले तौर पर दिया जाये क्यों कि जिन कारणों से सुरक्षा इंतजामों को धता बतलाते हुए मक्खी राष्ट्रपति ओबामा से रूबरू हो गई, उन कारणों को मटियामेट करना बहुत जरूरी है। गलतियों से अगर हम सबक नहीं लेंगे और बक-बक ही करते रहेंगे तो न घर के रहेंगे न घाट के, जिसकी वजह से ठाठबाट में भी गिरावट नजर आएगी। अंदर घुसने का यह एक ऐसा सीक्रेट है जो सिर्फ कुछ हुनरमंद ही जानते हैं। अच्छा हुआ यह रहस्य उजागर हो गया वरना इस हुनर का भी मक्खी के साथ इंतकाल हो गया होता। पता चला है कि जाँच आयोग बिठाने की कवायद शुरू हो चुकी है कि वो मक्खी अमेरिकी थी या अन्य किसी देश-विदेश से पधारी थी। उसके वाहन कुत्ते का भी अभी तक पता नहीं चला है। उसकी तलाश जोरों से जारी है।

वैसे मक्खी को मारकर ओबामा ने यह संदेश दिया है कि उनसे उलझने वाली ताकतों को मक्खी के माफिक मसल दिया जाएगा। यदि वे कुत्ते की माफिक गायब न हो जाएँ। यह संदेश सीधा प्रसारित हुआ है। इसकी सुर्खियाँ बनी हैं। यदि यह सब भारत में हुआ होता तो कई चैनल इस मक्खी प्रसंग के बल पर टी आर पी बटोर न जाने कितने करोड़ों के विज्ञापन जुटा चुके होते। अखबारों में पहले पेज पर मक्खी, जिंदा मक्खी और मरी हुई मक्खी के विभिन्न कोणों से खीचे गए चित्र उन नेताओं को चिढ़ा रहे होते जो येन-केन-प्रकारेण सदा पहले पेज पर अपनी विभिन्न आयामी फोटुओं को छपा हुआ देखने के लिए लालायित रहते हैं। मक्खी की बलि आर्थिक मंदी से आजादी का बिगुल बजा चुकी होती। बार बार मक्खी धुन बज रही होती और देख रही मक्खियाँ सिहर रही होतीं। ऐसी भी बहुत होतीं जो अपनी साथिन के पराक्रम पर गर्व कर रही होतीं। कुत्तें भौंक भौंक कर अपने साथी के फरार होने की खुशी प्रकट कर रहे होते। सुर्खियाँ होतीं : एक मक्खी ने तोड़ा राष्ट्रेपति का सुरक्षा घेरा, राष्ट्रकपति ने मक्खी का कत्ल किया, क्या एक राष्ट्रंपति इतना बेरहम हो सकता है, मक्खी की पहचान की जा रही है, मक्खी से उसका परिचय पत्र बरामद हो गया है, मक्खी का मोबाइल फोन बाहर गेट पर मिला है, अभी सिर्फ इसी चैनल पर इससे जुड़ी और सनसनीखेज वीडियो देखिएगा, जाइएगा मत।

इस प्रसंग में छिपे गहरे अर्थों की चीरफाड़ करने पर साफ नजर आता है कि कुत्ता-सवार मक्खियों पर अमेरिकी सुरक्षा तंत्र कारगर नहीं हो पाया है, वह तो कुत्ते को रोकता रहा और उस पर सवार होकर आई मक्खी महारानी टी वी पर अपनी बलि देकर स्टार बन गई। वैसे अभी-अभी समाचार मिला है कि जिसे मक्खी क्वीन बतलाया जा रहा है, पोस्टैमार्टम रिपोर्ट के बाद पता चला है कि वो मक्खा था। इस जानकारी के आते ही मीडिया को एक नया मुद्दा मिल गया है, जिसे भुनाने के लिए वो सक्रिय हो चुकी हैं।

६ जुलाई २००९