हास्य व्यंग्य


आतंकवादी की नाक खतरे में
अविनाश वाचस्पति


विश्‍व की महाशक्ति की नाक जिस आतंकवाद की महाशक्ति ने बेदम कर रखी है उस बेचारे की नाक खुद अपनी बीबियों के कारण खतरे में है। उसकी सारी शक्ति फिलहाल अपनी नाक बचाने में लगी हुई है। यह हैरतअंगेज खबर बाहर आने से अगर आतंकवादी को यह महसूस हो रहा हो कि जनता में उसके प्रति सहानुभूति की लहर उमड़ पड़ेगी तो उसे यहाँ भी दुखी होना पड़ेगा। इस खबर से किसी के भी मन में सहानुभूति की लहरें उमड़ने का समाचार नहीं मिला है बल्कि ऊँची नाक वाले आतंकवादी की साख चोटिल हो गई है। अगर आप यह मानते हैं कि आतंकवादियों की भी साख होती है तो आपको इस समाचार से अचरज नहीं हुआ होगा। लेकिन मुझे अचरज यह जानकर हुआ था कि लादेन अपनी बीबियों से दुखी है। जिसके पास समूची दुनिया को दुखी करने का अनलिमिटेड ठेका है उसे भी कोई दुखी कर सकता है? मुझे तो लगता है कि इस समाचार के उजागर करने में भी उसकी कोई चालाकी छिपी है। अगर कोई चालाकी नहीं है तो इस समाचार का सीधी सा अर्थ यही निकलता है कि बीबियों से अधिक आतंकवादी कोई नहीं है। हो सकता है कि इस घटना से बीबी के आतंकवादी होने का भ्रम फैलाने की साजिश रची जा रही हो या मूल मुद्दे की ओर से ध्‍यान भटकाने की कोशिश की जा रही हो जिससे हाल-फिलहाल में लादेन कोई बड़ा कारनामा करने में सफल हो सके।

आम हालातों में शौहर अपनी बीबी से तभी दुखी होते हैं जब वे उनसे घर के कार्य करवाने लगती हैं और बरतन मांजने के लिए कड़ाके की ठंड में भी गरम पानी की व्यवस्था नहीं करतीं। निःसंदेह इस स्थिति को दुखद माना जा सकता है तो क्‍या आजकल लादेन ऐसी ही विकट परिस्थितियों के संकट से जूझ रहा है। शौहर से सिर्फ चाय बनवाने या खाना बनवाने जैसी घटनाएँ अब दुर्घटनाओं की श्रेणी में नहीं गिनी जाती हैं। ये तो अब पुरुषों की दैनिक चर्या का अंग बन चुकी हैं। लेकिन आतंकवादियों को तो अपनी जान के लाले पड़े रहते हैं उस पर ये कठिन कर्म निश्चय ही उनके जीवन में आतंक भर देती होंगी। हालात तब और वीभत्‍स हो उठे होंगे जब उन्‍हें अपने नवजात शिशुओं की गीली लंगोटियाँ भी साफ करने के लिए मजबूर कर दिया गया होगा। पता नहीं बेचारे आतंकवादी के साथ क्या गुजर रही है। यह सब तो आशंकाएँ ही हैं और सत्य आशंकाओं से भयानक भी हो सकता है।

यह सूचना भी अपने आप में मजेदार है कि आतंकवादी की नाक होती है। मुझे पूरा विश्वास है कि उस नाक में सेंसर नहीं होंगे इसीलिए उसे सुगंध और दुर्गंध का भेद नहीं मालूम चलता है। ऐसी नाक रखकर खुद को नाकदार समझने का क्‍या फायदा है, इससे तो वो बेनाक ही भला, न नाक होगी न उसकी सूँघने की पवित्रता पर सवाल उठाये जायेंगे। नाक न होने से वह साँस भी नहीं ले सकेगा और इस सत्‍य को तो हम सभी स्‍वीकारेंगे कि जब एक आतंकवादी साँस नहीं लेता है तो मानवता साँस ले रही होती है। आतंकवादी दुखी हो सकता है पर जनता से नहीं क्‍योंकि जनता को तो डराने और दुखी करने के हज़ारों मौलिक अधिकार आतंकवादियों के पास होते है। लादेन की पाँचों बीबियां जब इकट्ठी होती हैं तो उस समय लादेन साँस भी उनसे पूछ कर ही लेता होगा, पत्नियों की संगठिक शक्ति का पूरा आरडीएक्स लादेन की ओर लगा होता होगा। लादेन को यह भय भी सताता होगा कि अगर वे पाँचों एक साथ उस पर टूट पड़ीं तो उसे टूटने फूटने से कोई नहीं बचा सकेगा, यह दुख तो सच ही बहुत बड़ा दुख है।

पत्‍नी पुरुषों के लिए समान्यतः दुखद प्राणी ही रही है। अगर पत्नी के साथ सुखी होना इतना सहज हुआ करता तो धरती की कुछ सभ्‍यताएँ बिना विवाह साथ रहकर जीवन यापन की जद्दोजहद क्‍यों कर रहीं होतीं। ना ही भारत में अस्वीकृत इस संबंध के समर्थन में माननीय सुप्रीम कोर्ट को अपनी कानूनी टांग अड़ानी पड़ती। जब से ऐसे संबंधों के बीच कानूनी टांग अड़ी है बहुत से लोगों ने अपनी उम्‍मीदें इसी पर टाँग दी हैं। खैर मुद्दे पर आते हुए कहना चाहिए कि जब अपनी कुख्‍यात आतंकवादी भी पत्नी से खौफ खाते हैं, तो कुछ न कुछ सत्य इसमें अवश्य है वरना आतंकवादी का पत्नी से दुखी होना गले नहीं उतरता। लादेन के दुखी होने की खबर के निहितार्थ प‍त्‍नी का बलशाली होना भी सिद्ध कर रहे हैं और यह साफ हो रहा है कि नारी अब अबला न रहकर एक ऐसी बला बन चुकी है जो किसी भी सबला का रूप बिगाड़ सकती है। सरकार को आतंकवादियों के विरुद्ध अब अपनी अधुनातन मुहिम में ऐसी महिलाओं को भी भर्ती करना होगा जो इनकी पत्‍नी बनकर इनके आतंकी हौंसले पस्‍त रखने का दम-खम रखते हुए देशभक्ति की मिसाल पेश कर सकें।

लादेन की हिम्मत की भी दाद देनी होगी। भीतर से चाहे कितना भी दुखी हो पर बाहर तो वह खुश ही दिखलाई देता है और इसी खुशी को जाहिर करने के लिए वह अपने वीडियो टेप में नाचता, मटकता या ठुमकता नजर आ जाता है। इससे आप भ्रमित न हों जब उसकी बीवियां उसको दुखी रखने में सुकून हासिल कर रही हैं उस समय आप पाला बदल कर उसकी बीवियों की खुशी में शामिल हो सकते हैं। जो खुश रहना चाहता है वह पाँच-पाँच बीवियां रखने की सोच भी कैसे सकता है? आजकल एक बीवी को संभालना भी आसान नहीं। जो जीवन में सुखों की अधिकता से उकता गया हो, उसी के लिए पाँच बीवियाँ रखना जीवन की सामान्‍य प्रक्रिया कही जा सकती है। इसे ध्‍यान में रखकर एक कानून बना दिया जाना चाहिए कि जिसकी पांच बीवियां होंगी, उसे आतंकवादी माना जाएगा। यह सरासर असंभव है कि किसी की पाँच बीवियाँ हों मगर वह आतंकवादी न हो। जब एक बीवी वाले आतंक की सीमाओं को पार कर जाते हैं तो पांच बीवियां रखने का बाद कोई सामान्‍य कैसे रह सकता है?

पाँच पत्नी धारक को आतंकश्री या आतंकितश्री से सम्‍मानित किए जाने की व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए। जिस व्यक्ति को पाँच पत्नियाँ आतंकित करेंगी तो वह कितना आतंक अपने अंदर समेट पाएगा – उसका आतंक बमों के रूप में फूट-फूटकर तो बाहर निकलेगा ही। इसलिए पहली नजर में लादेन के आतंकवादी होने में उसकी बीवियों का ही हाथ नज़र आता है। वैसे भी "डर कर जीने से डरा कर जीना बेहतर है" आतंकवादियों का मूल मंत्र होता है। एक कुख्‍यात आतंकवादी डरता नहीं है, वह दूसरों को डराकर अपने को शांत रखने की चेष्टा भर करता है। मुझे तो इसमें कोई बुराई नहीं दिखलाई देती। आपका क्‍या ख्‍याल है
?

१७ मई २०१०