आपकी प्रतिक्रिया 

   लिखे पढें 

 16 मई 2001

कहानियांकविताएंसाहित्य संगमदो पलकला दीर्घासाहित्यिक निबंधउपहारविशेषांक
फुलवारी हास्य व्यंग्य प्रकृति पर्यटनसंस्मरणप्रेरक प्रसंगरसोईस्वास्थ्यघर परिवार
पर्व परिचयशिक्षास्रोतआभारलेखकसंपर्क 

कहानियों में
यू के से तेजेन्द्र शर्मा की कहानी
जीना यहां किसके लिये

पिछले कुछ समय से बाऊजी ने एक चुप्पी सी ओढ़ रखी है।  एक शब्द भी तो नहीं बोलते।  यदि उनसे कुछ पूछते हैं तो भी अस्फुट से स्वरों में हां या नहीं जैसा उत्तर ही मिलता है।  हिम्मत नहीं जुटा पा रहा कि बाऊजी की आंखों में आंखें डाल कर देख पाऊं।  न जाने उन आंखों में क्या भाव हो।  जब बाऊजी ने यह बात कही होगीऋ उस समय उनकी अपनी मनःस्थिति क्या रही होगीऋन्ब्स्पऌ वे क्या सोच रहे होंगे ब्रक्त

साहित्य संगम  में  बिपिन बिहारी मिश्र की उड़िया कहानी प्रतियोगी हिन्दी रूपांतरकार हैं मधुसूदन साहा

मा बाप ने बड़े शौक से विघ्नराज नाम रखा था।  उन्हें मालूम था कि बाबू विघ्नराज तालचर ट्रेन की तरह रूक रूक कर एक एक क्लास पार करेंगे।  मैटि्रक पास करते करते वह बीस वर्ष का हो गया। दूब घास की तरह चेहरे पर मूछ दाढ़ी उग आई।  मन तितली की तरह उड़ने लगा।  कालेज में तीन वर्ष पार करते न करते पूरा फेमस। सभी जान गए बाबू विघ्नराज को।

नये अंकों की सूचना के लिये अपना इ मेल यहां लिख कर भेजें।


प्रकृति पर्यटन में
दीपिका जोशी का लंबा यात्रा वृतांत "सिंगापुर बैंकाक और पटाया का त्रिकोण

 

 शैलेष मटियानी अंक में विशेष
दो कहानियां
अर्धांगिनीमैमूद
और
यश मालवीय की कोमल लेखनी से शैलेश मटियानी की यादें उनके संजीदा संस्मरण में
जो कहते थे कि जीते रहिये

 

 

हास्य व्यंग्य में
राजेन्द्र त्यागी का जबरदस्त व्यंग्य
भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा

 

साहित्यिक निबंध में
दिविक रमेश की रचना
कला माध्यम संवाद या विवाद

 

संस्मरण में 
दुबई के खरीदारी उत्सव की मनोहर
यादों का ताज़ा चिठ्ठा मीनाक्षी
धन्वंतरि की कलम से
रियाध के पार दुबई में

 

दो पल में 
अश्विन गांधी की रोचक रचना
एक महल हो सोने का

 

अनुभूति
में दो संपूर्ण काव्य संकलन 
वसंती हवा और धूप के पांव

 

पिछले अंकों से

पर्व परिचय में मई माह के पर्व भारत में मई माह के पर्वो
और उत्सवों की जानकारी
 

घर परिवार  में मुखौटों का महत्व

फुलवारी में प्रमिला गुप्ता की कहानी दोस्ती और मिसबाहुदिन की कविता क्रिकेट

 

उपहार में मधुर संयोजन जितनी बार तुम्हें देखा है जावा आलेख  हिन्दी कविता के साथ
 

कला दीर्घा में पटचित्र के विषय में रोचक और जानकारी

 

प्रेरक प्रसंग में अब्दुर्रहीम खानखाना के जीवन पर आधारित  प्रेरक प्रसंग खानखाना की विनम्रता
 

रसोईघर  में बेल का शर्बत गर्मियों के मौसम में तरावट के लिये
 

स्वाद और स्वास्थ्य में 
बड़े काम का बेल के अंतर्गत बेल के गुणों की चर्चा

कहानियांकविताएंसाहित्य संगमदो पलकला दीर्घासाहित्यिक निबंधउपहारविशेषांक
फुलवारी हास्य व्यंग्य प्रकृति पर्यटनसंस्मरणप्रेरक प्रसंगरसोईस्वास्थ्यघर परिवार
पर्व परिचयशिक्षास्रोतआभारलेखकसंपर्क   

 सर्वाधिकार सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरूचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों  अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुर्नप्रकाशन की अनुमति नहीं है।ऋयह पत्रिका प्रति सप्ताह परिवर्धित होती है।

प्रकाशन : प्रवीन सक्सेन  परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन 
   सहयोग : दीपिका जोशी
तकनीकी सहयोग
  प्रबुद्ध कालिया