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घर-परिवार जीवन शैली - भारत के श्रेष्ठ गाँव


भारत के सर्वश्रेष्ठ गाँव
जो हम सबके लिये प्रेरणादायक हैं


३- हिवरे बाजार- लखपति परिवारों का गाँव

हिवरे बाजार एक ऐसा गाँव है, जहाँ खुशहाल हिन्दुस्तान की आत्मा निवास करती है। आज से २० वर्ष पहले यानी सन १९८९ में इस उजाड़ से गाँव को ३०-४० पढ़े-लिखे नौजवानों ने सँवारने का बीड़ा उठाया। गाँव वालों ने उन नौजवानों को पूरा सहयोग दिया। और गाँव के नजारे ही बदल गए। बंजर जमीन उपजाऊ हो गई है। एक फसल की जगह दो-दो फसल उगा रहे हैं। गाँव के लोगों ने अपने प्रयास से गाँव के आसपास १० लाख पेड़ लगाए। इससे भू-जल स्तर ऊपर आया है और माटी में नमी बढ़ने लगी है। अब यहाँ फसल क्या, लोग सब्जियाँ तक उगाते हैं।  आज इस गाँव में साठ से अधिक लोग ऐसे हैं जिनकी सम्पत्ति दस लाख रुपयों से अधिक है।

वे रोजगार के लिए पलायन नहीं करते। गाँव में प्रतिदिन स्कूल की कक्षा लगती है। आँगनवाड़ी रोज खुलती है। राशन की दुकान भी ग्राम सभा के निर्देशानुसार संचालित होती है। सड़कें इतनी साफ कि आप वहाँ कुछ फेंकने से शर्मा जाएँगे। पहले यहाँ लोगों की औसत आमदनी प्रतिवर्ष ८०० रुपये थी। अब २८००० रुपये हो गई है। पहले जो ग्रामवासी दूसरे गाँवों में जाकर मजदूरी करते थे अब प्रतिदिन २५०-३०० लीटर दूध का व्यापार करते हैं। हिवरे बाजार गाँव में राशन ग्रामसभा के निर्देशानुसार सबसे पहले प्रत्येक कार्डधारी को दिया जाता है। यदि उसके बाद भी राशन बच जाता है तो ग्रामसभा तय करती है कि इसका क्या होगा। हिवरे गाँव को जल संरक्षण के लिए २००७ का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।  

इस गाँव की सत्ता दिल्ली के दान की प्रतीक्षा नहीं करती, बल्कि उसी गाँव के लोग इसे संचालित करते हैं। इकबारगी यह झूठ लगता है पर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के हिवरे बाजार गाँव जाएँगे तो आप इस सच से रूबरू हो जाएँगे। इसमें दो राय नहीं कि हिवरे बाजार गाँधी के सपने को साकार करने के साथ-साथ घने अंधेरे में लौ जलाए हुए है।

 १ फरवरी २०१७

(अगले अंक में एक और गाँव)  पृष्ठ- . . .

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