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घर-परिवार बचपन की आहट


नवजात शिशु का छठा सप्ताह
इला गौतम


चैन की नींद

६ हफ़्ते और ६ महीने के बीच शिशु रात में ज़्यादा देर तक सोने की आदत बनाने लगता है। (लगभग ४ से ६ घन्टे)। यह एक मोटा मोटा हिसाब है और काफ़ी कुछ शिशु के विकास और माँ की दिनचर्या और आदतों पर निर्भर करता है।

अधिकतर नींद के विषेशज्ञ यह सुझाव देते हैं कि शिशु जब जग रहा हो लेकिन निंदासा हो तभी उसे बिस्तर पर लिटा दें। ऐसा करने से वह अपने आप सोना सीखेगा। यह कौशल माँ को बहुत काम आएगा जब शिशु रात को शूशू के लिए बार-बार उठेगा। शुरुआत से ही सोने की अच्छी आदतें, जैसे सोने के समय का नियमित कार्यक्रम (एक शांतिदायक स्नान, मालिश, या कहानी) स्थापित करके माँ शिशु को यह लक्ष्य जल्दी प्राप्त करने में सहायता कर सकती है।


संगीत में रुचि

शिशु अब दिन में ज़्यादा समय के लिए जगा रहता है। यह समय उनके सम्वेदनात्मक विकास के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। माँ शिशु के लिए उसकी मन पसंद लोरी या कोई गाना गा सकती है। शिशु को केवल बच्चों के गाने ही नही सुनाने चाहिए। पूरे घर को संगीत के स्वरों से भर दीजिए - शास्त्रीय संगीत से रॉक संगीत तक - और फिर देखिए शिशु अपनी पसंद कैसे कू की आवाज़ निकाल कर या हाथ पैर हिलाकर व्यक्त करता है। शिशु को हवा से बजने वाली घंटियों और घड़ी की आवाज़ भी आन्नदित कर सकती है। जितनी विभिन्न प्रकार की आवाज़ें बच्चा सुनेगा उतना ही उसके संगीत का अनुभव समृद्ध होगा। जैसे-जैसे शिशु अपनी पसंद विकसित करेगा वह दूसरी संगीत शैलियों की तुलना में किसी एक शैली की ओर अधिक प्रतिक्रिया दिखाएगा या उसे अधिक पसंद करेगा।

शिशु को हर समय संगीत ना सुनाते रहें क्यूँकि याद रहे कि शिशु के लिए कुछ समय शांत बिताना भी आवश्यक है।
अधिक उत्तेजित शिशु रोएगा, इधर-उधर देखेगा, परेशान और चिड़चिड़ा हो जाएगा। शिशु को और गतिविधियों या खेल में उलझाने से पहले उसे अपने आप को फिर से एकत्रित करने का समय दें।

अभिव्यक्ति का समय

शिशु अभी भले ही बात न कर सकता हो लेकिन उसका चेहरा बहुत कुछ कहता है। वह चहरे के अलग-अलग भावों के साथ प्रयोग करता है – ओंठ सिकोड़ना, भवें उचकाना, आँखों को बड़ा या भैंगा करना, और भौं सिकोड़ना। हो सकता है शिशु आपसे कुछ कह रहा हो - शायद कुछ देर में उसकी नैपी बदलनी होगी - या हो सकता है कि वह केवल अपनी नई खोजी गई क्षमताओं अभ्यास कर रहा हो।

स्तनपान या बोतल

यदि माँ शिशु को स्तनपान करा रही है लेकिन वह चाहती है कि शिशु अपने पिता या घर के किसी और बड़े व्यक्ति के हाथों बोतल से दूध पिए तो यही सही वक्त है। शुरुआत में थोड़ी मात्रा में पाऊडर का दूध या माँ का दूध बोतल में डालकर बच्चे को दें। हो सकता है कि शिशु शुरुआत में किसी और के हाथ से बोतल का दूध पीना ज़्यादा पसंद करे। यह पिता के लिए अच्छा मौका है शिशु के करीब आने का। इस समय माँ नहा सकती है, बाज़ार से घर का ज़रूरी समान ला सकती है, या फिर अपना कोई भी मनपसंद काम कर सकती है।

यदि माँ बच्चे को ऊपर का दूध कभी भी ना पिलाना चाहे तो यह भी सही है। हर माँ शिशु को ऊपर का दूध नही पिलाना चाहती। अगर माँ शिशु के भूख लगने के समय हमेशा उसके पास रह सकती है तो ऊपर का दूध देने की कोई आवश्यक्ता नही है।


याद रखें, हर बच्चा अलग होता है

सभी बच्चे अलग होते हैं और अपनी गति से बढते हैं। विकास के दिशा निर्देश केवल यह बताते हैं कि शिशु में क्या सिद्ध करने की संभावना है - यदि अभी नही तो बहुत जल्द। ध्यान रखें कि समय से पहले पैदा हुए बच्चे सभी र्कियाएँ करने में ज़्यादा वक्त लेते हैं। यदि माँ को बच्चे के स्वास्थ सम्बन्धित कोई भी प्रश्न हो तो उसे अपने स्वास्थ्य केंद्र की सहायता लेनी चाहिए।
 

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