मुखपृष्ठ

पुरालेख-तिथि-अनुसार-पुरालेख-विषयानुसार-हिंदी-लिंक-हमारे-लेखक-लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


कहानियाँ

आप्रवासी भारतीय लेखकों की कहानियों क संग्रह वतन से दूर में
संयुक्त अरब इमारात से कृष्ण बिहारी की कहानी— 'जड़ों से कटने पर'।


शमशाद से मैंने वादा कर रखा था कि अपनी दो महीने की छुट्टियों पर जाते हुए अपना टी.वी. और वी.सी.आर. उसे देता जाऊँगा। वैसे भी वह दो महीने बंद ही पड़ा रहता। मगर छुट्टियों से पहले एक मित्र ने मुझसे कहा कि उसके माता–पिता विजिट पर आ रहे हैं, उन्हें आराम से रखने के लिए सुविधापूर्ण जगह चाहिए।

यदि मैं अपना फ्लैट उसे दो महीने के लिए दे दूँ तो उसकी परेशानी खत्म हो जाएगी। जो किराया वह किसी अनजाने व्यक्ति को देगा वह बेहतर होगा कि मुझे मिले। मित्र का सोचना अपनी जगह सही था। वह आबूधाबी में अकेले किसी दूसरे बैचलर के साथ एक कमरे में साझा करते हुए रह रहा था। उसी कमरे में माता–पिता को रखना संभव नहीं था। उनके लिए उसे अस्थाई तौर पर कमरा लेना ही पड़ता।

चूँकि, वे विजिट पर आ रहे थे अतः कम से कम दो महीना तो रहते ही। ऐसे में अलग बाथरूम और किचेन सुविधा भी चाहिए थी। रोज–रोज होटल से खाना असंभव तो नहीं था परन्तु उसमें कठिनाइयाँ जरूर थीं। मित्र यह भी चाहता था कि यदि मैं उसे अपना फ्लैट दे दूँ तो वह अपने माता–पिता के साथ रहते हुए उन्हें अधिक समय दे सकेगा। मुझे मित्र का सुझाव सही लगा। मैं सपरिवार दो महीने के लिए जा रहा था। उस अवधि का किराया मुझे देना ही था। दो महीने के किराए की रकम भी कम नहीं थी। लगभग चालीस हजार रुपए होते थे।

पृष्ठ- . .

आगे—

 
1

1
मुखपृष्ठ पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार । अपनी प्रतिक्रिया  लिखें / पढ़े
1
1

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।

 

hit counter