पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP            पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


फुलवारी खोज-कथाएँ

खोज-उपकरण

दुनिया की खोज के समय, जब रेडियो या रडार नहीं होते थे खोज यात्री अपने रास्ते का ध्यान रखने के लिए सूरज, चाँद और सितारों की सहायता लेते थे। खोज की लंबी समुद्री यात्राओं में दिशा बताने का काम यही करते थे।

सबसे पहले कुतुबनुमे का आविष्कार चीन में ४००० साल पहले हुआ, लेकिन यूरोपीय लोग एक हज़ार साल पहले तक इसके प्रयोग के विषय में कुछ नहीं जानते थे।

पंद्रहवीं शताब्दी के कुछ ऐसे नक्शे मिले हैं जिनमें जिनमें समुद्र तट से संबंधित विषयों को चित्रित किया गया है। इनमें प्रमुख बंदरगाह और समुद्र के असुरक्षित स्थानों को दिखाया गया है।

सत्रहवीं शताब्दी में दूरबीन का आविष्कार हुआ। इसकी सहायता बहुत दूर तक देखा जा सकता था। नाविकों को जब आसमान में उड़ते हुए पक्षी दिखाई देते थे तब वे समझ जाते थे कि किनारा पास ही है।

खोज कथाएँ .२.३.४.५.६ 

७ जनवरी २००८

इस रचना पर अपनी प्रतिक्रिया लिखें - दूसरों की प्रतिक्रिया पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।