आज सिरहाने। उपन्यास। उपहार। कहानियाँ। कला दीर्घा। कविताएँ। गौरवगाथा। पुराने अंक नगरनामा। रचना प्रसंग। घर–परिवार। दो पल। नाटक। परिक्रमा। पर्व। प्रकृति। पर्यटन प्रेरक प्रसंग। प्रौद्योगिकी। फुलवारी। रसोई। लेखक। विज्ञान वार्ता। विशेषांक। हिंदी लिंक साहित्य संगम। संस्मरण। साहित्य समाचार। साहित्यिक निबंध। स्वास्थ्य। हास्य व्यंग्य
भरे पटाखे रावण में
भरे पटाखे रावण में लगी भीड़ चंपारण में
हल्ला गुल्ला धूम धड़ाका मेला ठेला खूब जमा था
रामचंद्र ने छोटा तीर रावण जला महा गंभीर
1मना दशहरे का त्योहार सच की जीत दुष्ट की हार
—पूर्णिमा वर्मन
1 अक्तूबर 2002
इस रचना पर अपनी प्रतिक्रिया लिखें - दूसरों की प्रतिक्रिया पढ़ें
आज सिरहाने। उपन्यास। उपहार। कहानियाँ। कला दीर्घा। कविताएँ। गौरवगाथा। पुराने अंक। नगरनामा। रचना प्रसंग घर–परिवार। दो पल। नाटक। परिक्रमा। पर्व–परिचय। प्रकृति। पर्यटन। प्रेरक प्रसंग। प्रौद्योगिकी। फुलवारी। रसोई। लेखक विज्ञान वार्ता। विशेषांक। हिंदी लिंक। साहित्य संगम। संस्मरण। साहित्य समाचार। साहित्यिक निबंध। स्वास्थ्य। व्यंग्य
© सर्वाधिकार सुरक्षित "अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9–16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।