हास्य व्यंग्य

सपने में साक्षात्कार
-गुरमीत बेदी


बीवी कल मायके में थी और मैं बहुत दिनों बाद लंबी तान कर सोया। ज़ाहिर है, भरपूर नींद भी आई और सपने भी आए। जब बीवी बैडरूम में साथ होती है तो सपनों पर भी कर्फ्यू लगा रहता है। इस बार जैसे ही कर्फ्यू में छूट मिली तो सपनों की रील चलनी शुरू हो गई। सपना न तो डरावना था और न ही सुहावना। यानि कि सपने में न तो महँगाई ने चाँटे मारे और न ही किसी फीमेल ने किसी रोमांटिक प्रसंग को अंजाम दिया। सपने में देश के एक रहनुमा अवतरित हुए और मैंने पूरे पाँच घंटे उनसे गुफ़्तगू की। मुल्क में अपनी स्थिति से लेकर मुल्क की स्थिति पर उनसे व्यापक चर्चा हुई। देश के होनहार नागरिक के नाते मेरा यह फ़र्ज़ बनता है कि इस चर्चा यानि गुफ़्तगू यानि साक्षात्कार को आप सबके मानस पटल पर रखा जाए। संपादक की पूर्वानुमति के साथ लीजिए पेश हैं - देश के रहनुमा से सपने में लिए साक्षात्कार के कुछ ग़ैरसंपादित अंश -
प्रश्न : मुल्क किस दिशा में जा रहा है और मुल्क का भविष्य क्या है?
उत्तर : मुल्क की चिंता मत करो। वह न तो कहीं से आया है और न ही कहीं जाएगा। मुल्क यहीं था और यहीं रहेगा इंडिया में। डोंट वरी अबाऊट मुल्क!
प्रश्न : लेकिन विरोधी तो यही कह रहे हैं कि मुल्क दिशाहीन हो गया है?
उत्तर : हमारी सफलताओं को देखते हुए विरोधी खुद दिशाहीन हो चुके हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि किस तरह खुद को जनता का मसीहा और हमें देश का कसाई साबित किया जाए। आप मेरे हवाले से यह लिखिए कि पब्लिक को दिशाहीन विरोधियों की ऊलजलूल बातें माइंड नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न : आप पर आरोप लग रहे हैं कि आपने देश और विदेश में अकूत बेनामी संपति बनाई है?
उत्तर : यह आरोप सरासर ग़लत हैं। क्या आपने मेरा नाम दुनिया के अरबपतियों की सूची में पढ़ा है? क्या आपने कभी मेरी इन्कमटैक्स रिटर्न देखी है? आप दोनों जगह वैरीफाई कर लीजिए, आपको खुद पता चल जाएगा कि अपुन के पास क्या है? जो थोड़ी-बहुत संपत्ति मुल्क व मुल्क के बाहर हमारे पास है, वह मेरे बच्चों ने मेरे आशीर्वाद से बनाई है।
प्रश्न : पब्लिक को भी आपने कभी आशीर्वाद दिया?
उत्तर : (हँसते हुए) हम तो पब्लिक के दास हैं। उल्टा पब्लिक हमें आशीर्वाद देती है और हम इस आशीर्वाद में से कुछ अंश अपने पास रखकर बाकी के आशीर्वाद की सप्लाई अपने बच्चों और रिश्तेदारों को कर देते हैं।(हँसी जारी रहती है)।
प्रश्न : आरक्षण के बारे में आपका क्या ख़याल है?
उत्तर : बिल्कुल नेक ख़याल है। आरक्षण का लाभ अगड़ों को भी मिलना चाहिए और पिछड़ों को भी, अमीरों को भी मिलना चाहिए और ग़रीबों को भी, ऊँची जाति वालों को भी मिलना चाहिए और छोटी जाति वालों को भी। इससे मुल्क में समाजवाद आएगा।
प्रश्न : ऐसे में आरक्षण के मायने क्या रहेंगे?
उत्तर : मायने तलाशने के लिए एक आयोग बनाया जा सकता है।
प्रश्न : मुल्क के सामने सबसे बड़ी समस्या क्या है?
उत्तर : सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारे ही लोग हमारी टाँग खींच रहे हैं। बंद कमरे में वह हमारे साथ सहमति जताते हैं और पब्लिक के बीच जाते ही हमारी आलोचना शुरू कर देते हैं। इससे कई बार हमारी पोज़ीशन बड़ी ऑकवर्ड हो जाती है।
प्रश्न : आप पर दंगे भड़काने का आरोप भी लगा है। क्या कहना चाहोगे?
उत्तर : यह आरोप सरासर मिथ्या है। जिस रात दंगे भड़के, उस रात मैं मुंबई के एक पाँच सितारा होटल में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर बुक करवाए गए कमरे में 'व्यस्त' था।
प्रश्न : क्या आपको दंगों की ख़बर नहीं हुई?
उत्तर : मैने इतने ज़्यादा पैग लगा लिए थे कि मुझे खुद अपनी ही ख़बर नहीं थी।
प्रश्न : कश्मीर की समस्या के बारे में आपका क्या कहना है?
उत्तर : इस बारे में अधिकारिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति ही कुछ कह सकते हैं।
प्रश्न : अफ़गानीस्तान और इराक में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए आप क्या कर रहे हैं?
उत्तर : हम दूसरे देशों के लफड़े में नहीं पड़ते। वहाँ रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भगवान भरोसे है और हम दुआ करेंगे कि भगवान पर लोगों का भरोसा कायम रहे।
प्रश्न : महँगाई से निपटने के लिए कोई कार्य योजना?
उत्तर : किस-किस से निपटें? जब मुल्क तरक्की करेगा तो महँगाई बढ़ेगी ही। महँगाई इस बात की प्रतीक है कि हम हिंदुस्तानी कितना जीवट रखते हैं। महँगी-महँगी चीज़ें भी खाते हैं। दूसरे मुल्क क्या खाकर हमारा मुक़ाबला करेंगे?
प्रश्न : मुल्क आत्मनिर्भर कब बनेगा?
उत्तर : जब 'हम' आत्मनिर्भर हो जाएँगे। न किसी को किसी से चंदा माँगने की ज़रूरत पड़ेगी और न घोटाले करने की।
प्रश्न : आप सबसे ज़्यादा ध्यान किस बात पर लगा रहे हैं?
उत्तर : घोटालों और समस्याओं पर से जनता का ध्यान हटाने पर!
प्रश्न : इसमें सफलता की कितनी उम्मीद है आपको?
उत्तर : मुल्क के लोगों की याददाश्त बहुत पुअर है। जैसे ही नई समस्या क्रीयेट होती है, लोगों का ध्यान पुरानी समस्या से हट जाता है। आज़ादी के बाद से हमारा अनुभव बताता है कि हमें ऐसे मामलों में अच्छी-ख़ासी सफलता मिलती रही है।
प्रश्न : बढ़ती आबादी पर अंकुश कैसे लगेगा?
उत्तर : हमें इसकी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। समाज में लगातार कन्या भ्रूण हत्या का प्रचलन बढ़ रहा है। एक दिन ऐसा भी आएगा कि फीमेल प्रजाति का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और बढ़ती आबादी पर अपने आप नकेल लग जाएगी। न होगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।
प्रश्न : फ़ुरसत के पलों में आप क्या करते हैं?
उत्तर : मैं इस बारे रहस्योद्घाटन करके कोई नया विवाद पैदा नहीं करना चाहता। सांकेतिक रूप से आप यह समझ लीजिए कि फ़ुर्सत के पलों में जो-जो काम बाकी के पालिटिशियन करते हैं, उनमें से कुछ एक काम अपुन भी कर लेते हैं।
प्रश्न : मुल्क में खेलों को बढ़ावा देने के लिए आप क्या करेंगे?
उत्तर : इसके लिए विभिन्न खेल संघों के अध्यक्ष केवल पालिटिशियन्ज ही बनाए जाएँगे। क्योंकि पालिटिशियन्ज के तेवर हमेशा जुझारू रहते हैं इसलिए खिलाड़ियों को उनसे हमेशा प्रेरणा मिलती रहेगी। इसके अलावा वही खिलाड़ी टीमों में चुने जाएँगे जिनके पालिटिकल तार मज़बूत होंगे। जिन खिलाड़ियों का कोई ख़ैर-ख़्वाह नहीं होगा, उनके मामले में कोई रिस्क नहीं लिया जाएगा।
प्रश्न : आपकी किन खेलों में दिलचस्पी है?
उत्तर : कुश्ती और निशानेबाजी में। हम विरोधियों को हमेशा निशाने पर रखते हैं और मौका मिलते ही उन्हें लंगड़ी लगाना नहीं भूलते, इसलिए कुश्ती और निशानेबाजी को आप अपुन का प्रिय खेल मान सकते हैं।
प्रश्न : सुना है आपकी बीवी नाराज़ होकर आपसे अलग रहने लगी है?
उत्तर : इसमें विदेशी हाथ है।

24 जून 2006