मुखपृष्ठ

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP            पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


कहानियाँ

समकालीन हिंदी कहानियों के स्तंभ में इस सप्ताह प्रस्तुत है
भारत से
नवनी मिश्र की कहानी- 'विश्वास'


"वीर जी," कानों में पहले कभी न पड़ा संबोधन गया तो मैंने पीछे मुड़ कर देखा। किसी गिरहर इमारत जैसी वे मेरे ठीक पीछे खड़ी थीं। सब तरफ़ से झूल गया बुढ़ापे का शरीर। सामने के दाँत टूटने लगे थे जिसके कारण होंठ अपने टिके होने का आधार खो रहे थे और पूरा चेहरा डोनाल्ड डक जैसा लगने लगा था। खिचड़ी बाल कहीं-कहीं पर काफ़ी कम हो गए थे और गंजापन झलकने लगा था। मदद की गुहार करती-सी आँखें जिनकी उपेक्षा करके आगे बढ़ जाना संभव नहीं होता। दाहिने गाल पर एक काला मस्सा था जो उनके गोरे रंग पर आज भी डिठोने-सा दमकता लग सकता था लेकिन मस्से पर उगे सफ़ेद बालों के गुच्छे ने उनके चेहरे को विरूपित कर रखा था। उनके माथे पर गहरी सिलवटें थीं जिनमें पसीने की महीन लकीरें चमक रही थीं। उन्होंने कृपाण धारण कर रखी थी जिसकी म्यान का पट्टा उनके कंधे पर दुपट्टे के नीचे से झाँक रहा था।

उनके लिए आदतन वीरजी, कह बैठना अधिक सुविधाजनक रहा होगा।
"जी," मैंने उनसे पूछा।
"यह बैंक वाले मुझे चेकबुक नहीं दे रहे। कहते हैं पहले ही दी जा चुकी है। लेकिन मैंने तो चेकबुक कभी ली ही नहीं।"

उन्होंने इतनी-सी बात को बहुत बेचैनी से छटपटाते हुए कहा।

पृष्ठ . .

आगे—

 

अपनी प्रतिक्रिया  लिखें / पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसारहिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।

 

hit counter