मुखपृष्ठ

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP            पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


कहानियाँ

समकालीन हिंदी कहानियों के स्तंभ में इस सप्ताह प्रस्तुत है भारत से
राजीव पत्थरिया की कहानी— मरब्बा


पंडित जी सुना है सरकार हमारे इलाके में डैम बनाने जा रही है, घसीटू बोला।
''हाँ कुछ-कुछ ऐसा मैंने भी सुना है।
अगर यहाँ डैम बन गया तो हम लोगों के तो दिन फिर गए।`` घसीटू खुशी से अपना कुप्पा सा मुँह फुलाकर बोला।
ये दोनों लँगड़े हलवाई की दुकान पर बैठे चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे कि सामने से पंचायत प्रधान ठाकुर लच्छीयाराम भी मूँछों को ताव देते हुए कारिंदों के साथ आते दिखे तो बिहारी पंडित हाथ जोड़ बोला ''जयराम जी की प्रधान जी, आइये चाय पीजिये।``
''ओ जय-जय पंडित जी, क्या महफिल लगी है।``
''कुछ नहीं प्रधान जी सुना है सरकार यहाँ कोई बड़ा डैम बना रही है। आपको तो सरकार की सारी खबर रहती है, क्या यह सच है?``
बीच में लंगड़ा हलवाई भी बोला, ''प्रधान जी अगर यहाँ डैम बन गया तो हमारा
क्या होगा, आप ही सरकार को समझाओ कुछ।``


नोट:- यह कहानी हिमाचल में बनी जलविद्युत परियोजना पौंग बाँध के विस्थापितों की पीड़ा को व्यक्त करती है। इसमें मरब्बा शब्द का अर्थ जमीन का वह बड़ा भाग है जो विस्थापितों को खेती के लिए राजस्थान में मिला था।

पृष्ठ : . . .

आगे-

अपनी प्रतिक्रिया  लिखें / पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसारहिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।

 

hit counter