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अभिव्यक्ति में सूर्यबाला
की रचनाएँ

संस्मरण में
एक छोटी यात्रा : एक नन्हीं सहयात्री
गौरव गाथा में
आखिरवीं विदा
कहानियों
में
दादी और रिमोट
पीले फूलों वाला फ्राक
हीरो

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सूर्यबाला
जन्म : 25 अक्तूबर 1944 वाराणसी में।
शिक्षा : वाराणसी विश्वविद्यालय
से हिंदी साहित्य में पीएच. डी.।
कार्यक्षेत्र : कार्य का प्रारंभ आर्य महिला विद्यालय में अध्यापन से। 1972
में पहली कहानी सारिका में प्रकाशित। 1975 में बंबई आने के बाद लेखन में विशेष
प्रगति। 1975 में प्रकाशित पहला उपन्यास मेरे संधिपत्र विशेष रूप से चर्चित। डॉ.
सूर्यबाला ने अभी तक 150 से अधिक कहानियाँ, उपन्यास, व हास्य व्यंग्य लिखे हैं।
इनमें से अधिकांश हिंदी की प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। अनेकों
आकाशवाणी व दूरदर्शन पर प्रसारित हुए हैं और बहुतों का देश विदेश की अनेक भाषाओं
में अनुवाद हुआ है।
सम्मान-पुरस्कार : साहित्य में
योगदान के लिए 'प्रियदर्शिनी पुरस्कार', 'घनश्याम दास सराफ़ पुरस्कार' तथा काशी
नागरी प्रचारिणी सभा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मुंबई विद्यापीठ, आरोही, अखिल
भारतीय कायस्थ महासभा, सतपुड़ा संस्कृति परिषद आदि संस्थाओं से सम्मानित।
आपका व्यक्तिगत जालघर यहाँ हैः
http://suryabala.20m.com
प्रमुख कृतियाँ -
उपन्यासः 'मेरे संधि पत्र', 'सुबह के इंतज़ार तक',
'अग्निपंखी', 'यामिनी-कथा', 'दीक्षांत'
कहानी संग्रहः 'एक इंद्रधनुष', ' दिशाहीन', 'थाली भर चाँद', 'मुँडेर पर',
'गृह-प्रवेश', 'कात्यायनी संवाद', 'सांझवाती'।
व्यंग्यः अजगर करे न चाकरी, झगड़ा निपटारक दफ़तर, 'धृतराष्ट्र टाइम्स'।
दूरदर्शन धारावाहिक: 'पलाश के फूल', 'न, किन्नी न', 'सौदागर दुआओं के', 'एक
इंद्रधनुष जुबेदा के नाम', 'सबको पता हैं', 'रेस' तथा 'निर्वासित' आदि प्रमुख हैं।
संपर्क :
anurag_lal@hotmail.com
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