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 १. १. २०१९

इस माह-

अनुभूति में-
नव वर्ष के अवसर पर विविध विधाओं में अनेक रचनाकारों के संवेदनशील मन की भावभीना उपहार रचनाएँ।

-- घर परिवार में

रसोईघर में- इस माह नव वर्ष के स्वागत का उत्सव मनाते हुए हमारी रसोई संपादक शुचि प्रस्तुत कर रही हैं - ओट अखरोट और किशमिश कुकी

स्वास्थ्य में- २४ आसान सुझाव जो जल्दी वजन घटाने में सहायक हो सकते हैं- १- मांसाहार और पानी दोनो पर ध्यान दें।

बागबानी- तीन आसान बातें जो बागबानी को सफल, स्वस्थ और रोचक बनाने की दिशा में उपयोगी हो सकते हैं। सुरक्षा और सुझाव-

अभिरुचि में- डाक-टिकटों से सम्बंधित कुछ ज्ञानवर्धक बातों से भरपूर प्रशांत पंड्या का आलेख- शौक डाकटिकटों के संग्रह का

- रचना व मनोरंजन में

क्या आप जानते हैं- इस माह (जनवरी) की विभिन्न तिथियों में) कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

संग्रह और संकलन- में प्रस्तुत है- शुभम श्रीवास्तव ओम की कलम से रविशकर मिश्र रवि के नवगीत संग्रह- ''संदर्भों से कटकर'' का परिचय।

वर्ग पहेली- ३०९
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि-आशीष के सहयोग से


हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

साहित्य एवं संस्कृति में-  नव वर्ष के अवसर पर

भावना सक्सेना की कहानी- नयी भोर

कई दिन ऐसे बीतते हैं जैसे कि एक दिन में सैकड़ों जिंदगियाँ जी आए हैं, लेकिन फिर भी कोई एक काम रह जाता है अधूरा और वह भी ऐसा जिसे आप सबसे ज्यादा मन से करना चाह रहे थे। सुबह उठते ही जिसे सोचा लेकिन वही नहीं हो पाता। पिछले दो दिन से वह उर्मिला काकी से मिलने और उन्हें विद्यालय के नववर्ष के उत्सव का निमंत्रण देने जाने की सोच रही थी लेकिन... आगे-

और
लकी राजीव की कहानी मोह के धागे

अलार्म बंद करके मैं रजाई में दुबकी रही! सवा छ: ही था, आधा घंटा और सही। वैसे भी टहलने तो जाना नहीं था...पार्क याद आते ही मन खिन्न हो गया! कल तक तक तो केवल यही वजह ही रह गई थी, खुश रहने की, अब वो भी खत्म हो चुकी थी। सामने वाले घरों की सफेद, पीली बत्तियाँ जल चुकी थीं। एक-एक करके सब ताला लगाकर पार्क की ओर निकलने भी लगे होंगे... आगे...
*

त्रिलोचना कौर की
लघुकथा- गरमाहट
*

परिचय दास का ललित निबंध-
नव वर्ष संकल्प की आँच
*

अपर्णा द्विवेदी का आलेख
नव वर्ष के विभिन्न रूप
*

पुनर्पाठ में बृजेश कुमार शुक्ला का आलेख
नई कविता में नया साल

पिछले अंक-में---

भावना सक्सेना की
लघुकथा- अच्छा समय
*

कुमार रवीन्द्र से रचना प्रसंग में-
हरियाणा में नवगीत- दशा और दिशा
*

शशांक दुबे से फिल्म इल्म में-
संगीतकार चित्रगुप्त 
*

पुनर्पाठ में गुणाकर मुले का आलेख
भारतीय कैलेंडर की विकास यात्रा
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साहित्य संगम में मोहन कल्पना की सिंधी कहानी का रूपांतर- झलक, रूपांतरकार हैं देवी नांगरानी

सर्दियों की सर्द रात थी। हम शिव मंदिर के पास पीपल के पेड़ के नीचे बैठे थे। हम दोनों में से किसी ने भी कुछ बात नहीं की। हवा पीपल के पत्तों को छू रही थी। पीपल चाँदनी को चूम रहा था और मैं सिंधू की ओर देख रहा था जिसमें सितारों की रोशनी भरी हुई थी।
अचानक दोनों उठकर खड़े हो गए। ठंडी ने अपना असर दिखाना शुरू किया था।
उसने मेरे क़रीब आकर कोट की जेब में हाथ डाला। हाथ आर-पार निकल आया। जेब फटा हुआ था। सिंधू को पता न था कि वह कोट मेरा नहीं बल्कि मेरे दादा का था, जिसने मेरे पिता को दिया था और उसी रात यह मुझे मिला।
‘ये क्या?’
‘जैसी मेरी ज़िन्दगी।’
‘क्या बोल रहे हो?’
‘मध्यम श्रेणी का आदमी हूँ न।’
उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया। आहिस्ता से कहा - ‘फिर तुम नौकरी क्यों नहीं ढूँढ़ते?’
‘नौकरी के लिये मारा-मारा भटकता तो हूँ।’ आगे...

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"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है
यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित होती है।


प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

 
सहयोग : कल्पना रामानी
 

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