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गौरव गाथा में
इस माह
प्रस्तुत है भारत से नीरजा हेमेन्द्र की
कहानी
अमलतास के फूल

मैं ठीक समय पर बैंक में पहुँच
कर अपने कार्य में व्यस्त हो गई। व्यस्तता तो थी, किन्तु हृदय
आज कुछ विचलित और अशान्त-सा भी हो रहा है। मैं यह तो नहीं कह
सकती कि "न जाने क्यों?" आज हृदय के विचलित होने का जो कारण
है, उसे मैं समझ भी रही हूँ।
प्रतिदिन की भाँति आज भी प्रसन्न मन से मैं कार्यालय आई थी।
बैंक आकर जब कुछ सहकर्मियों ने मुझे मेरे जन्मदिन की बधाई दी,
तब मुझे स्मरण हुआ कि आज मेरा जन्मदिवस है। जीवन की आपाधापी
में मैं आज का दिन विस्मृत कर बैठी थी। कार्यालय में एक-दो
परिचितों का भी फोन आया। तब से ही हृदय अशान्त-सा है,
विचलित-सा है। जन्मदिवस का स्मरण भी भला हृदय के विचलित होने
का कारण हो सकता है? मैं दिन भर यही सोचती रही।
...आगे-
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