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अनुभूति

9. 1. 2006 

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पिछले सप्ताह

हास्य व्यंग्य में
डा नरेन्द्र कोहली की रचना
नया साल मुबारक हो

°

दृष्टिकोण में
रामेश्वर दयाल कांबोज हिमांशु का आलेख
नये साल में संकल्प लें

°

पर्व परिचय में
दीपिका जोशी का आलेख
देश देश में नववर्ष

°

फुलवारी में
देश देशांतर के अंतर्गत यू के फ्रांस जर्मनी
और शिल्प कोना में
नए साल का कलेंडर

°

कहानियों में
यू के से तेजेन्द्र शर्मा की कहानी
पासपोर्ट के रंग

मजबूरी तो इंग्लैंड आना भी थी। लेकिन यह मजबूरी बिछड़ने की नहीं, मिलने की थी, साथ रहने की थी। पत्नी की मृत्यु के बाद का अकेलापन, किसी अपने के साथ रहने की चाह और इकलौता पुत्र। यही सब गोपालदास जी को लंदन ले आया था। बेटी विवाह के बाद अमरीका में है और बेटा इंग्लैंड – बेचारे गोपालदास जी अकेले फरीदाबाद में अपनी बड़ी सी कोठी में कमरे गिनते रहते। अधिकतर रिश्तेदार दिल्ली में। अब तो फरीदाबाद से दिल्ली जाने में भी शरीर नाराज़गी ज़ाहिर करने लगता था। ऐसे में ज़ाहिर सी बात है कि इंद्रेश ने अपने पिता की एक नहीं सुनी और उन्हें लंदन ले आया था।

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इस सप्ताह

कहानियों में
भारत से राजनारायण बोहरे की कहानी
बाज़ार बाज़ार

"सर कभी आपने सोचा कि एक सपना होगा आपका भी, कि आपके पास खूब सारा पैसा हो!  . . .बड़ा सा बंगला हो! . . .शानदार कार हो! भाभी के पास ढेर सारे जेवर हों! आपके बच्चे ऊंचे स्कूल में पढ़ने जाएं! आप लोग भी फ़ॉरेन टूर पर जाएं! यानी कि आपके पास वे सारी सुख–सुविधाएं हों जो एक आदमी के जीवन को चैन से गुज़ारने के लिए ज़रूरी हैं। लेकिन आप लोग मन मसोस के रह जाते हैं, क्योंकि आपके सामने वैकल्पिक रूप में अपनी इतनी बड़ी इच्छाएं पूरी करने के लिए कोई साधन नहीं हैं। छोटी–मोटी एजेंसी या नौकरी से यह काम कभी पूरे नहीं होंगे– हैं न! एम आय राईट?"

°

सामयिकी में
सन 2006 के पर्वों की जानकारी के लिए
पर्व पंचांग

°

हास्य व्यंग्य में
रामेश्वर दयाल कांबोज की रचना
शकुनी मामा

°

मंच मचान में
अशोक चक्रधर के शब्दों में
रेल में चलता है पर इतना
नहीं चलता

°

रसोईघर  में
माइक्रोवेव अवन में तैयार करें
भरवां टमाटर

सप्ताह का विचार
नुष्य मन की शक्तियों के बादशाह हैं। संसार की समस्त शक्तियां उनके सामने नतमस्तक हैं। —अज्ञात

 

अनुभूति में

हाइकु महोत्सव में
तरह तरह के हाइकु
साथ में देश विदेश के ढेर से 
हिंदी हाइकुकारों
का वृहत मेला

नव वर्ष विशेषांक समग्र

–° पिछले अंकों से °–

कहानियों में
पापा तुम कहां हो–अलका प्रमोद
गर्म कोट–राजेन्द्रसिंह बेदी
संदेसे आते हैं–सुषमा जगमोहन
रिश्ते–उषा वर्मा
बहाने से–संजय विद्रोही
मणिया–अमृता प्रीतम
°

हास्य व्यंग्य में
काश दिल घुटने में होता–राजर्षि अरूण
किलर इंस्टिंक्ट–महेश चंद्र द्विवेदी

कुते की आत्मा–विनय कुमार
शोषण के विरूद्ध–डा नरेन्द्र कोहली
°

प्रौद्योगिकी में
रविशंकर श्रीवास्तव का आलेख
डिजिटल पेन
°

विज्ञान वार्ता में
डा गुरूदयाल प्रदीप की सम्यक चेतावनी
गरमाती धरती और लापरवाह हम
°

प्रकृति और पर्यावरण में
गुरमीत बेदी बता रहे हैं कि एकदिन
हवा हो जाएंगी चिड़ियां
°

नगरनामा में
पराग कुमार मांदले का उज्जैन
करोगे याद तो . . . 
°

संस्मरण में
नीरजा द्विवेदी की कलम से
वह कौन थी
°

आज सिरहाने
डा सुरेश चंद्र शुक्ल द्वारा संपादित संकलन
प्रवासी कहानियां

 

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"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरूचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1 – 9 – 16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

प्रकाशन : प्रवीन सक्सेना  परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन 
 सहयोग : दीपिका जोशी
फ़ौंट सहयोग :प्रबुद्ध कालिया

   

 

 
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