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समकालीन कहानियों में
इस माह
प्रस्तुत है- भारत से नीलिमा टिक्कू की कहानी
खुशी के रंग
होलिका
दहन के साथ ही अग्नि के समक्ष चहुँ ओर चक्कर लगाते हुए मिनी ने
एक कागज आग की लपटों के हवाले कर दिया था। इसके साथ ही मानो
उसके दिमाग से एक भारी बोझ उतर गया था। दूसरे दिन होली खेलने
के लिए रंग बिरंगी गुलाल की थालियाँ सजाती मिनी के समक्ष अतीत
के चलचित्र उभरने लगे थे।
बेहद जिन्दादिल हँसमुख सुधीर भैया... सभी की आँखों का तारा थे।
बचपन से ही हर त्योहार पर उनका उत्साह देखते ही बनता था। होली,
दीवाली, दशहरा, ईद, क्रिसमस, राखी, बैसाखी सभी को खास बनाती
उनकी मित्रमंडली मौहल्ले में भैया एवं उनके दोस्त बलजिन्दर
इरफान और मैसी की चौकड़ी सबकी मनभावन थी।
उसे भी अच्छा लगता था जब राखी पर भैया के सभी दोस्त उससे राखी
बँधाते ईद पर घर में लज्जतदार सेवियाँ आती, क्रिसमस पर मैसी
भैया के घर से आये चॉकलेट व केक खाने को मिलते दीवाली पर सभी
के साथ मिलकर पटाखे चलाते।
...आगे-
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