|
समकालीन कहानियों में
इस माह
प्रस्तुत है- भारत से निरंजना किशोर
की
कहानी
प्यार की
भाषा
मैंने
कहा, “राम-राम अम्मा!”, “राम-राम बहिनी!” उन्होंने जवाब दिया।
ग्राहक आते रहते—कोई ‘राम-राम अम्मा’, तो कोई ‘नमस्ते अम्मा’,
तो कोई ‘कैसे हो अम्मा’ पूछता और वह अपने हिसाब से सबके
अभिवादन का जवाब देती।
रामचरण और उसकी अम्मा दोनों पार्क के बगल में सब्ज़ी का ठेला
लगाते और सब्ज़ियाँ बेचते। वहाँ लाइन से कई सब्ज़ीवाले
अपनी-अपनी ठेली लिए खड़े रहते, लेकिन रामचरण और उसकी अम्मा के
सौम्य एवं मर्यादित व्यवहार के कारण उनके ठेले पर ही सारी भीड़
उमड़ती।
लोग पार्क से भ्रमण, योग, व्यायाम करके निकलते तो ताज़ी
सब्ज़ियों पर नज़र पड़ ही जाती। दूसरी तरफ़ एक गाड़ीवाला अपनी
गाड़ी में रस निकालने की मशीन रखकर रस निकालता। किसी को लौकी
का रस पीना है, तो किसी को करेले का, तो किसी को गिलोय का। एक
तरफ़ नारियलवाला खड़ा रहता।
...आगे-
***
|