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लेखकों से
१. १२. २०२०

इस माह-

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अनुभूति में-

सर्दी के मौसम पर केंद्रित विभिन्न विधाओं में विविध रचनाकारों की अनेक रचनाएँ।

-- घर परिवार में

रसोईघर में- वर्ष के अंतिम माह में हमारी रसोई संपादक शुचि क्रिसमस के मेहमानों के लिये विशेष रूप से प्रस्तुत कर रही हैं- ब्लैक फारेस्ट केक

स्वास्थ्य के अंतर्गत- दिल की आवाज सुनो- बारह उपाय जो रखें आपके दिल की सेहत को दुरुस्त १२- विटामिन और आक्सीकरण रोधी गोलियाँ।

बागबानी- आयुर्वेद की दृष्टि से उपयोगी बारह पौधे जो हर घर में उगाए जा सकते हैं। इस अंक में प्रस्तुत है- १२- दमबेल का पौधा।

बचपन की आहट- शिशु-विकास के अध्ययन में संलग्न इला गौतम की डायरी के पन्नों से- नवजात शिशु- उनचासस से बावन सप्ताह तक

- रचना व मनोरंजन में

क्या आप जानते हैं- इस माह (दिसंबर) की विभिन्न तिथियों में) कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

संग्रह और संकलन- में प्रस्तुत है- डॉ.राजेन्द्र गौतम की  कलम  से  बाबूराम शुक्ल  के  नवगीत संग्रह- संवेदन के मृगशावक का परिचय। 
वर्ग पहेली- ३३२
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि-आशीष के सहयोग से


हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

साहित्य एवं संस्कृति के अंतर्गत- सर्दी का मौसम

समकालीन कहानियों में यू.के. से
कादंबरी मेहरा की कहानी एक खत

इंटरनेट पर किसी ने एक नसीहती सन्देश भेजा है।
'' हैपी बर्थडे! आप आज सत्तर वर्ष के हो गए! अब समय आ गया है कि गैरज़रूरी सामान को अपने हाथों से दान कर दें। पुराने, बेकार कागज़ पत्तर छाँट कर फाड़ दें। आपके शरीर की ताक़तें दिन-बा दिन कम होती जायेंगी। बची हुई ताक़त व समय को सेहत बनाने पर खर्चें ...''
सन्देश तो बहुत लंबा है। मेरी बीवी निशा चाय ले आई है। सुबह का दस बज रहा है। बर्थडे का तोहफा ---ब्रेकफास्ट इन बेड! रोज़ महारानी सोई रहती है। बेहद वज़नदार नौकरी करती थी। सुबह तारों की छाँव जाती थी और शाम को तारों की छाँव घर पहुँचती थी। अब उसे हक है देर तक सोने का। सर्दी भी तो देखिये! बाहर बर्फ जमी है। माईनस चार तापमान! बाहर जाने का तो सवाल ही नहीं उठता। मैंने उसे लैपटॉप पर आया सन्देश पढवा दिया। महा गलती करी... आगे-
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डॉ. सुरेश अवस्थी का व्यंग्य
चौराहे पर ठंड पेट में अलाव
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घर परिवार में-
डॉ. भावना कुँअर का आलेख- सर्दियों में सर्दी
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डॉ. अशोक उदयवाल से जानें
सर्दी की दुआ बथुआ
 
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बच्चों के लिये फुलवारी में
पूर्णिमा वर्मन की कविता- सर्दी में

विशेषांक में अन्य लेख-

प्रकृति और पर्यावरण में

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शरद ऋतु- महेन्द्र सिंह रंधावा

रहस्य रोमांच में-

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गन्ने में शेर- योगोश प्रवीण

स्वास्थ्य और स्वाद में-

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सर्दियों में सरसों का साग- डॉ. अशोक उदयवाल

विज्ञानवार्ता में-

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गरमा-गरम चाय की प्याली: आप के
स्वास्थ्य के नाम
—डॉ गुरुदयाल प्रदीप 


समकालीन कहानियों में प्रस्तुत है भारत से
शरद उपाध्याय की कहानी प्रतीक्षा

आज उनकी नींद जल्दी ही खुल गई थी। सर्दी के दिन थे। दिन अभी नहीं निकला था। आसमान लालिमा लिये सूरज की प्रतीक्षा कर रहा था। पत्नी हमेशा की तरह उठ गई थी। नहाकर अपने पूजा के बर्तन माँज रही थी। तभी उन्हें उठा देख उनके लिए पानी ले आई और चाय बनाने चली गई। वे बाहर अखबार लेने आ गए। मोहल्ला धीरे-धीरे जाग रहा था। पड़ोस की छत पर शर्माजी अपनी पत्नी के साथ चाय पी रहे थे। सड़क पर आवा-जाही शुरू हो गई थी। लोग-बाग घूमने के लिए निकल रहे थे। उन्हें देखकर एक गाय तेजी से आकर दरवाजे पर खड़ी हो गई। उन्होंने जमीन पर पड़ा अखबार उठाया और अंदर आ गए। पत्नी ने चाय बनाकर टेबल पर रख दी।
"क्या बात है, आज जल्दी उठ गए?"
"हाँ, बस ऐसे ही नींद खुल गई। मैंने सोचा, उठ ही जाऊँ।" कहकर वे अखबार पढ़ने लगे।... आगे-

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