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टीम अभिव्यक्ति कथा
महोत्सव- २००८ के परिणामों को घोषित करने हुए गर्व और
प्रसन्नता का अनुभव करती है।
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हम उन सभी
लेखकों, सहयोगियों, प्रायोजकों, संयोजकों और
निर्णायकों और निर्णायकों का
आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने इसे सफल बनाया।
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महोत्सव
में कुल १०४ कहानियाँ प्राप्त हुईं। अधिकतर कहानियाँ
रोचक हैं, विषयों में विविधता है, भाषा-शैली की
प्रभावशाली हैं और हिन्दी के वैश्विक स्वरूप को और
मजबूती के साथ स्थापित करती हैं। लेकिन नियमों के
अंतर्गत कुछ ही कहानियों को चुना जाना था अतः जो
कहानियाँ नहीं चुनी जा सकीं उनके लिए हमें खेद
है।
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घोषित
शब्द सीमा के अंदर पर्याप्त कहानियाँ न आने के कारण
शब्द संख्या की सीमा बढ़ाकर निर्णय घोषित किया जा रहा
है। नियम के
इस
परिवर्तन की सूचना पहले दी जा चुकी है।
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महोत्सव
में पहले से घोषित १० पुरस्कारों के अतिरिक्त टीम ने
चुनी हुई २०
अतिरिक्त कहानियों को भी पुरस्कृत करने का निर्णय लिया
है। इन कहानियों को १००० रुपये का नकद पुरस्कार और
प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
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महोत्सव
में पुरस्कृत कहानियों को क्रमवार प्रकाशित करने में
लगभग ८ महीने का समय लग सकता है। हम अपेक्षा रखते हैं
कि अभिव्यक्ति में प्रकाशन से पहले इन कहानियों को
किसी भी वेब साइट या पत्र-पत्रिका में प्रकाशित नहीं
किया जाए। यदि ऐसा हुआ तो कहानी को
महोत्सव से बाहर किया जा सकता है। अभिव्यक्ति में
प्रकाशन के बाद कहानियों को कहीं भी प्रकाशित किया जा
सकता है।
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जो
कहानियाँ महोत्सव में पुरस्कार के लिए नहीं चुनी जा
सकी हैं, वे कहीं भी प्रकाशन के लिए स्वतंत्र हैं।
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अजय कुमार गुप्त की
कहानी- रेलगाड़ी
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ईश्वर सिंह चौहान की
कहानी- रति का भूत |
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दुर्गादत्त जोशी की
कहानी- दूसरी औरत |
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प्रवीण पंडित की
कहानी- कबीरन बी |
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फ़ज़ल इमाम मल्लिक
की कहानी- उदास आँखों वाला लड़का |
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मदन मोहन उपेन्द्र
की कहानी- रम्मो बुआ |
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मनमोहन भाटिया की
कहानी- शिक्षा |
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मनोज तिवारी की
कहानी- जय माता दी |
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महेश द्विवेदी की
कहानी- चाची |
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मिलिंद तिखे की
कहानी- एक प्यार का पल हो |
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रचना श्रीवास्तव की
कहानी- पार्किंग |
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राजेन्द्र त्यागी की
कहानी- अनजान रिश्ते |
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राहुल ब्रजमोहन की
कहानी- विनिवेश |
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श्याम सखा श्याम की
कहानी- आखिरी बयान |
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शैलजा सक्सेना की
कहानी- शार्त्र |
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शैली खत्री की कहानी-
बादल छँट गए |
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स्वाती भालोटिया की
कहानी- अबोध |
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संतोष गोयल की कहानी-
भटकन |
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सुमन बाजपेयी की
कहानी- अदृश्य आकार |